सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट पर लिया कड़ा रुख, केंद्र सरकार और CBI से मांगा जवाब

नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो) : उच्चतम न्यायालय ने डिजिटल अरेस्ट की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए स्वत: संज्ञान लिया है। जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट करने के लिए उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालयाें के आदेशों और जजों के हस्ताक्षर की जालसाजी करना न्यायिक संस्थाओं में लोगों के विश्वास और आस्था पर कुठाराघात है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और सीबीआई से जवाब तलब किया है।

उच्चतम न्यायालय ने अंबाला के एक बुजुर्ग दंपति को डिजिटल अरेस्ट कर उनसे एक करोड़ रुपये से ज्यादा की उगाही करने की घटना पर स्वत: संज्ञान लिया है। बुजुर्ग दंपति ने चीफ जस्टिस बीआर गवई को पत्र लिखकर इस जालसाजी के बारे में बताया था। कोर्ट ने कहा कि ये मामला एकमात्र मामला नहीं है। इसे लेकर मीडिया में कई खबरें आ चुकी हैं। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक दस्तावेज की जालसाजी, निर्दोष लोगों और खासकर वरिष्ठ नागरिकों से जबरन वसूली और लूट से जुड़े आपराधिक कृत्य का खुलासा करने के लिए केंद्र और राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय की जरुरत है।

बुजुर्ग दंपति ने पत्र में कहा था कि 3 से 16 सितंबर के बीच दंपति की गिरफ्तारी और निगरानी की बात करने वाला मुहर लगा एक जाली अदालती आदेश पेश किया गया। इसके बाद कई बैंक लेनदेन के जरिये एक करोड़ रुपये के अधिक की धोखाधड़ी की गई। बुजुर्ग महिला के मुताबिक कुछ लोगों ने ऑडियो और वीडियो कॉल के जरिये कोर्ट के आदेश दिखाए।

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