नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो): BRICS सम्मेलन को लेकर कांग्रेस के सवालों पर भाजपा ने पलटवार किया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जब दुनिया के कई बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष भारत में मौजूद हैं, ऐसे समय में कांग्रेस के नेता पूछ रहे हैं कि ब्रिक्स से भारत को क्या मिलेगा। उन्होंने कांग्रेस को अपने शासनकाल के दौरान देश की आर्थिक और वैश्विक स्थिति पर भी नजर डालने की सलाह दी।
आईएमएफ की रिपोर्ट का किया जिक्र
शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित पत्रकार वार्ता में रविशंकर प्रसाद ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और उसके लचीलेपन को रेखांकित किया है। उनके मुताबिक, आईएमएफ ने सेवाओं, विनिर्माण और व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत की प्रगति को भी स्वीकार किया है।
भाजपा सांसद ने इसे भारत की मजबूत होती अर्थव्यवस्था का प्रमाण बताया।
BRICS सम्मेलन में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष
BRICS सम्मेलन का उल्लेख करते हुए प्रसाद ने कहा कि रूस के राष्ट्रपति भारत पहुंच चुके हैं, जबकि चीन के राष्ट्रपति अगले दिन दिल्ली पहुंचेंगे। ईरान के राष्ट्रपति भी भारत के लिए रवाना हो चुके हैं। इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका और मिस्र के राष्ट्रपति भी दिल्ली पहुंच चुके हैं।
उन्होंने कहा कि दुनिया के एक बड़े हिस्से के नेता इस समय दिल्ली में मौजूद हैं। ऐसे समय में कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं की ओर से यह सवाल उठाया जा रहा है कि BRICS से भारत को क्या हासिल होगा। प्रसाद ने कहा कि इस सवाल का जवाब इतिहास के आईने में देखना चाहिए।
‘फ्रेंजाइल फाइव’ का किया जिक्र
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि 2011, 2012 और 2013 में भारत की अर्थव्यवस्था को ‘फ्रेंजाइल फाइव’ देशों में शामिल किया गया था। उस समय गोल्डमैन सैक्स की ओर से भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर गंभीर टिप्पणियां की गई थीं।
उन्होंने दावा किया कि उस दौर में भारत में निवेश के सूखने की बात कही जा रही थी। स्थिति इतनी खराब बताई जा रही थी कि कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने BRICS में भारत की जगह इंडोनेशिया को शामिल करने का सुझाव तक दिया था।
मौजूदा भारत की स्थिति से तुलना करने की सलाह
भाजपा सांसद ने कहा कि यह उस समय भारत की आर्थिक स्थिति थी, जबकि आज देश वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक मंच पर मजबूत भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने कांग्रेस नेताओं से कहा कि ब्रिक्स को लेकर सवाल उठाने से पहले उन्हें अपने शासनकाल के भारत और मौजूदा भारत की स्थिति की तुलना करनी चाहिए।

