नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो) : धरती पर अब तक पांच बार महाविनाश हो चुके हैं, जब लाखों प्राणियों का अंत हुआ, लेकिन एक अद्भुत जीव, जिसे पानी वाला भालू (Tardigrade) कहा जाता है, हमेशा जीवित रहा। इस जीव की बेमिसाल सहनशक्ति ने इसे न केवल पृथ्वी पर, बल्कि अंतरिक्ष में भी जीवित रहने की अद्वितीय क्षमता दी है। अब भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला इसे अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) ले जा रहे हैं। वैज्ञानिक जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर क्या कारण है, जिससे यह जीव पृथ्वी के सबसे कठिन और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी जीवित रहता है।
पानी वाला भालू (Tardigrade) की अद्भुत क्षमता
पानी वाला भालू, जिसे Tardigrade भी कहा जाता है, का आकार महज 0.5 से 1.5 मिलीमीटर तक होता है, यानी यह जीव बहुत छोटा होता है। यह जीव किसी भी कठोर परिस्थिति में जीवित रह सकता है, जैसे अत्यधिक गर्मी, ठंड, रेडिएशन, और यहां तक कि अंतरिक्ष में भी।
इसकी सबसे खास बात है इसका क्रिप्टोबायोसिस नामक प्रक्रिया, जो इसे अत्यधिक परिस्थितियों में जीवित रहने में मदद करती है। जब पर्यावरणीय संकट आता है, तो यह जीव अपनी मेटाबोलिक प्रक्रिया को लगभग पूरी तरह से बंद कर देता है और एक सूखी, सिकुड़ी हुई अवस्था में चला जाता है, जिसे टन (TUN) कहा जाता है। इस अवस्था में, पानी वाला भालू अपने शरीर का 95 प्रतिशत पानी खो देता है और यह कांच जैसी स्थिति में बदल जाता है।
पानी वाला भालू -272.95°C से लेकर 150°C तक के तापमान में जीवित रह सकता है और 30 साल तक सूखी अवस्था में भी जीवित रह सकता है। यह प्रक्रिया इसे रेडिएशन, वायुमंडलीय दबाव और यहां तक कि अंतरिक्ष की वैक्यूम जैसी स्थिति से भी बचाती है।
पांच महाविनाशों के बावजूद जीवित रहना
पानी वाला भालू पृथ्वी पर 5 बार आए महाविनाशों से बच चुका है, जिनमें सबसे बड़ा वह था जब उल्का पिंड के गिरने से डायनासोरों का अंत हुआ था। इन विनाशों के बावजूद यह जीव जीवित रहा और अपनी प्रजाति को बचाए रखा। इसके अद्भुत जीवन रक्षा तंत्र ने वैज्ञानिकों को इसे अधिक समझने और इसके जीवित रहने की क्षमता पर शोध करने के लिए प्रेरित किया है।
शुभांशु शुक्ला और अंतरिक्ष मिशन
शुभांशु शुक्ला अब पानी वाले भालू को अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर ले जा रहे हैं। उनका उद्देश्य यह जानना है कि यह जीव अंतरिक्ष के वातावरण में कैसे प्रतिक्रिया करेगा। क्या यह जीव अंतरिक्ष के दबाव, तापमान और रेडिएशन को सहन कर पाएगा, जैसे यह पृथ्वी पर करती है? यह मिशन यह भी पता लगाने का अवसर प्रदान करेगा कि इस जीव की अद्भुत सहनशक्ति का मानव जीवन में कैसे उपयोग हो सकता है।
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