स्टारलिंक को भारत में लाइसेंस, 15 दिन में शुरू होगा ट्रायल, गली-गली में पहुंचेगा इंटरनेट

नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो) : भारत में अब जल्द ही स्टारलिंक, एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा, अपनी शुरुआत करने जा रही है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने स्टारलिंक को भारत में ब्रॉडबैंड और सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं प्रदान करने का आधिकारिक लाइसेंस दे दिया है। इसके बाद अब इस सेवा का ट्रायल 15 दिनों के भीतर शुरू होने वाला है। यह भारत के ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाने में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

भारत में स्टारलिंक की शुरुआत: ट्रायल का आगाज
TRAI (भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण) द्वारा सैटेलाइट कंपनियों के लिए स्पेक्ट्रम के प्रशासनिक आवंटन की सिफारिश की गई थी, और इसके बाद स्टारलिंक को लाइसेंस मिल गया। हालांकि, DoT की ओर से अब तक स्पेक्ट्रम की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन उम्मीद है कि 15-20 दिनों में इस प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा और ट्रायल शुरू हो जाएगा।

स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं भारत के दूर-दराज के इलाकों में विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने में मदद करेंगी, जहां पारंपरिक ऑप्टिकल फाइबर या मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से इंटरनेट कनेक्टिविटी मुश्किल होती है।

सैटेलाइट इंटरनेट: सरकार की नई पहल
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हाल ही में स्टारलिंक को सैटेलाइट कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक अहम पहल के रूप में पहचान दी। उन्होंने कहा, “सैटेलाइट कनेक्टिविटी हमारे टेलीकॉम सेक्टर का अहम हिस्सा बन गई है, खासकर उन इलाकों में जहां वायर्ड कनेक्शन पहुंचाना मुश्किल है।”

उनके अनुसार, स्टारलिंक का लाइसेंस तीसरा लाइसेंस होगा जो सैटेलाइट इंटरनेट सेवा प्रदान करेगा। इससे पहले, OneWeb और रिलायंस को भी लाइसेंस मिल चुका है। स्टारलिंक के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन होने के बाद, देशभर में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू हो सकती हैं।

TRAI की सिफारिशें और भविष्य
TRAI ने सैटेलाइट कंपनियों से 4% AGR (एजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू) शुल्क लेने की सिफारिश की है। हालांकि, इन सिफारिशों को अभी तक मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन इसके मंजूरी मिलने के बाद स्टारलिंक की सेवा जल्द ही आम लोगों के लिए उपलब्ध हो सकती है।

स्टारलिंक के माध्यम से भारत में इंटरनेट का दायरा गांव-गांव तक फैल सकता है। यह नई तकनीकी क्रांति भारतीय इंटरनेट बाजार को एक नया आयाम दे सकती है।

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