नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो): Supreme Court ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOC) को एक महिला उम्मीदवार को 12 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। मामला एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में नौकरी से जुड़ा है, जहां महिला उम्मीदवार सुमित्रा को कथित तौर पर केवल महिला होने के आधार पर रीफिलिंग हेल्पर के पद पर नियुक्त नहीं किया गया था।
1998 में दिया था नौकरी के लिए इंटरव्यू
मामला हरियाणा के गुढ़ा गांव की रहने वाली सुमित्रा से जुड़ा है। उन्होंने वर्ष 1998 में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में खलासी, चपरासी या रीफिलिंग हेल्पर के पद के लिए इंटरव्यू दिया था।
सुमित्रा का नाम उन 49 उम्मीदवारों की सूची में शामिल था, जिनकी नियुक्ति की सिफारिश डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता वाली कमेटी ने की थी। इसके बाद सूची में शामिल अन्य उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिए गए, लेकिन सुमित्रा को नियुक्ति नहीं मिली।
इसके बाद उन्होंने अपने साथ हुए व्यवहार को अदालत में चुनौती दी और मामले में लंबी कानूनी लड़ाई शुरू हुई।
महिला ने निचली अदालत में दी चुनौती
मामला ट्रायल कोर्ट पहुंचा। अदालत ने माना कि सुमित्रा नौकरी के लिए निर्धारित योग्यता पूरी करती थीं। इसके बाद मामले में IOC की ओर से अपील की गई और निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई।
इसके बाद मामला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट तक पहुंचा। हाई कोर्ट में भी नियुक्ति से संबंधित कानूनी विवाद जारी रहा।
हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
अक्टूबर 2025 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप करते हुए IOC को सुमित्रा को मजदूर के अलावा किसी अन्य उपयुक्त पद पर नियुक्त करने का निर्देश दिया था।
इस फैसले के खिलाफ इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। Supreme Court में सुनवाई के दौरान IOC की ओर से महिला उम्मीदवार को रीफिलिंग हेल्पर का काम नहीं दिए जाने के पीछे काम की प्रकृति से जुड़े तर्क रखे गए।
IOC की दलील पर सुप्रीम कोर्ट के सवाल
सुनवाई के दौरान IOC के वकील की ओर से कहा गया कि रीफिलिंग हेल्पर के काम में भारी LPG सिलेंडर उठाने पड़ते हैं और रात की शिफ्ट में भी काम करना पड़ सकता है। इसी आधार पर अधिकारियों ने उस समय महिला उम्मीदवार को इस काम के लिए उपयुक्त नहीं माना होगा, ऐसा तर्क अदालत के सामने रखा गया।
इस पर Supreme Court ने सवाल किया कि क्या महिलाएं अपने घरों में LPG सिलेंडर नहीं उठातीं?
अदालत ने महिला की गरिमा और समान अवसर के संवैधानिक सिद्धांतों पर भी टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि भारत में महिलाओं के सम्मान की बात की जाती है और महिलाओं को देवी के समान माना जाता है। ऐसे में सरकारी कंपनी की ओर से महिला को केवल उसके लिंग के आधार पर अवसर से वंचित करना गंभीर सवाल खड़ा करता है।
12 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश
Supreme Court ने मामले में सुमित्रा को 12 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश IOC को दिया है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नौकरी के अवसर में महिला और पुरुष के बीच भेदभाव को लेकर अदालत के सामने उठाए गए सवाल सीधे समानता और महिला गरिमा से जुड़े हैं।
सुमित्रा की कानूनी लड़ाई कई वर्षों तक चली। करीब तीन दशक पुराने इस विवाद में अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मुआवजे का रास्ता साफ हुआ है।
महिला उम्मीदवारों के समान अवसर पर जोर
मामले की सुनवाई के दौरान Supreme Court की टिप्पणियां इस व्यापक प्रश्न से जुड़ी हैं कि किसी नौकरी के लिए उम्मीदवार की योग्यता और काम करने की वास्तविक क्षमता को आधार बनाया जाना चाहिए या केवल लिंग के आधार पर उसे अवसर से दूर किया जा सकता है।
Supreme Court के आदेश में इस मामले से जुड़े पक्षों की लंबे समय से चली आ रही कानूनी प्रक्रिया और महिला उम्मीदवार के अधिकारों पर विचार किया गया है।

