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बिजली कटौती से धान की रोपाई पर मंडराया संकट,भूना में फूटा किसानों का गुस्सा

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बिजलीघर के सामने लगाया 7 घंटे लंबा जाम

सडक़ों पर उतर आए। आक्रोशित किसानों ने भूना-रतिया मार्ग पर चक्का जाम कर दिया, जिससे सडक़ के दोनों ओर वाहनों के पहिये थम गए और मीलों लंबी कतारें लग गईं। किसानों ने चिलचिलाती धूप की परवाह न करते हुए सडक़ के बीचों-बीच दरी बिछा दी और करीब सात घंटे तक डटे रहे। माहौल गरमाता देख बिजली निगम के एसडीओ सत्यवान आनन-फानन में अमले के साथ मौके पर पहुंचे।

हालांकि, किसानों का गुस्सा इस कदर था कि उन्होंने अधिकारी को कुर्सी देने के बजाय भीषण गर्मी में सडक़ पर अपने बीच बिठा लिया और जमकर खरी-खोटी सुनाई। एसडीओ ने तकनीकी खामियों का हवाला देते हुए जल्द व्यवस्था सुधारने का राग अलापा, लेकिन किसान खोखले आश्वासनों से संतुष्ट नहीं हुए। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा कि यह समय धान की रोपाई और खरीफ फसलों के लिए सबसे कीमती है। ऐसे समय में घंटों के अघोषित कटों ने कमर तोड़ दी है। अगर बिजली आती भी है, तो वोल्टेज इतना कम होता है कि ट्यूबवेल पानी छोड़ देते हैं या मोटर फूंकने का डर रहता है। पानी न मिलने से रोपी गई धान की पौध सूखने की कगार पर है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। किसानों ने कहा कि वह हम दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुके थे। अधिकारियों को बार-बार शिकायतें दी गई, लेकिन जब सुनवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई, तो हमें मजबूरी में सडक़ जाम करने का यह कदम उठाना पड़ा। बिजली निगम के आला अधिकारियों ने तकनीकी दिक्कतों को दूर कर जल्द ही नियमित सप्लाई का दावा किया है, लेकिन किसानों ने दोटूक अल्टीमेटम दे दिया है। किसानों का साफ कहना है कि जब तक खेतों में निर्बाध बिजली नहीं दौड़ती, तब तक उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं।

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