जम्मू, वायरल सच (ब्यूरो) : बाबा बर्फानी के जयकारों और “बम-बम भोले” के गगनभेदी नारों के बीच, श्री अमरनाथ यात्रा 2025 की पवित्र यात्रा में एक नया उत्साह जुड़ गया है। आज तड़के जम्मू के भगवती नगर स्थित आधार शिविर से 6,365 श्रद्धालुओं का एक नया जत्था पवित्र गुफा की ओर रवाना हुआ, जो इस साल की अब तक की एक और बड़ी खेप मानी जा रही है।
प्रशासन और सुरक्षाबलों ने इस जत्थे को रवाना करने के लिए चाक-चौबंद इंतजाम किए थे। अधिकारियों के अनुसार, तीर्थयात्री 211 हल्के व भारी वाहनों के काफिले में रवाना हुए हैं, जिन्हें कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कश्मीर घाटी में स्थित श्री अमरनाथ गुफा की ओर भेजा गया।
इस जत्थे में 2,851 तीर्थयात्री पहलगाम मार्ग से और 3,514 बालटाल मार्ग से यात्रा कर रहे हैं। इन दोनों मार्गों पर यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बल, जम्मू-कश्मीर पुलिस, ITBP और CRPF के जवान तैनात हैं।
38 दिवसीय यात्रा: भक्ति, साहस और श्रद्धा का संगम
इस वर्ष अमरनाथ यात्रा की शुरुआत 2 जुलाई को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर की गई थी। यात्रा का समापन 9 अगस्त को होगा। यह 38 दिवसीय यात्रा केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखती, बल्कि भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक ताने-बाने की गहराई को भी उजागर करती है।
अब तक 2.52 लाख से अधिक श्रद्धालु कर चुके दर्शन
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 2.52 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा अमरनाथ के पवित्र हिमलिंग के दर्शन कर चुके हैं। हर दिन हजारों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए घाटी की ओर बढ़ रहे हैं, जो इस तीर्थ यात्रा की लोकप्रियता और श्रद्धा का प्रमाण है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य की विशेष व्यवस्था
इस बार की यात्रा में विशेष रूप से स्वास्थ्य सुविधाएं, मौसम से संबंधित चेतावनी प्रणाली, और पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान दिया गया है। यात्रियों के लिए जगह-जगह मेडिकल कैंप, मोबाइल अस्पताल, ऑक्सीजन बूथ और आपातकालीन सेवाएं तैनात की गई हैं।
इसके साथ ही, सरकार और सामाजिक संस्थाओं द्वारा तीर्थयात्रियों को प्लास्टिक मुक्त यात्रा के लिए प्रेरित किया जा रहा है। स्वच्छता अभियान के तहत कई स्वयंसेवी संस्थाएं और नगर निगम के कर्मचारी कार्यरत हैं।
अमरनाथ यात्रा का धार्मिक महत्व
श्री अमरनाथ यात्रा हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थों में गिनी जाती है। मान्यता है कि इसी गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। यह गुफा समुद्र तल से लगभग 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और साल के अधिकांश समय बर्फ से ढकी रहती है।
प्राकृतिक रूप से बनने वाला हिमलिंग इस यात्रा का मुख्य आकर्षण होता है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु हर साल कश्मीर घाटी पहुंचते हैं।
यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह
तीर्थयात्रियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। भगवती नगर शिविर में दिन-रात ‘हर हर महादेव’ और ‘जय शिव शंकर’ के नारे गूंज रहे हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों से आए श्रद्धालु इस यात्रा को अपने जीवन का पुण्य कार्य मानते हैं।
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