ED Cadre Restructuring: 3,256 होंगे स्वीकृत पद

ED का दायरा बढ़ेगा: स्वीकृत पदों में 60% की बढ़ोतरी, 3,256 होगी कुल संख्या

नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो): आर्थिक अपराधों और धनशोधन से जुड़े मामलों की जांच करने वाली प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार ने लंबे समय से लंबित कैडर पुनर्गठन को मंजूरी दे दी है। इसके बाद ED के स्वीकृत पदों की संख्या में करीब 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी।

पुनर्गठन के बाद ED में स्वीकृत पद 2,029 से बढ़कर 3,256 हो जाएंगे। नई व्यवस्था को 1 जनवरी 2027 से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

131 से बढ़कर 241 होंगी कार्य इकाइयां

ED ने बेंगलुरु स्थित आईआईएम में 14 और 15 सितंबर को आयोजित 36वें त्रैमासिक क्षेत्रीय अधिकारियों के सम्मेलन के बाद यह जानकारी साझा की।

कैडर पुनर्गठन के तहत निदेशालय के ढांचे का विस्तार किया जाएगा। इसकी कार्य इकाइयों की संख्या 131 से बढ़ाकर 241 करने की योजना है।

इसके अलावा धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) से जुड़े मामलों के लिए 50 जोन बनाए जाएंगे। वहीं विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के मामलों के लिए दिल्ली, चंडीगढ़, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में पांच समर्पित जोन प्रस्तावित किए गए हैं।

आर्थिक अपराधों की जांच में तेजी के निर्देश

सम्मेलन में ED निदेशक ने अधिकारियों को आर्थिक अपराध, बैंक धोखाधड़ी, बिल्डर-खरीदार धोखाधड़ी, IBC से जुड़े मामलों और साइबर अपराध की जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए।

लंबित मामलों को जल्द निपटाने के साथ-साथ मुकदमों में दोषसिद्धि की दर बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया।ED

हर क्षेत्र में 10 महत्वपूर्ण मामलों पर फोकस

सम्मेलन में यह तय किया गया कि ED का प्रत्येक क्षेत्र कम से कम 10 महत्वपूर्ण मामलों की पहचान करेगा। इन मामलों की सुनवाई और मुकदमे की प्रक्रिया को छह से आठ महीने के भीतर अंतिम चरण तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

इसके साथ ही अपराध से अर्जित संपत्तियों को वास्तविक पीड़ितों तक वापस पहुंचाने की प्रक्रिया को भी प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया।

73,800 करोड़ से ज्यादा की संपत्तियां पीड़ितों के लिए चिह्नित

ED के मुताबिक अब तक 76 मामलों में 73,800 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां पीड़ितों को लौटाने की प्रक्रिया के तहत चिह्नित या हस्तांतरित की जा चुकी हैं।

सम्मेलन में जांच व्यवस्था को आधुनिक बनाने पर भी चर्चा हुई। इसमें तकनीक, साइबर फॉरेंसिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अपराधों की जांच क्षमता बढ़ाने को प्रमुखता दी गई।

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