इस्लामाबाद/वॉशिंगटन, वायरल सच (ब्यूरो) : ट्रम्प नोबेल नामांकन को लेकर पाकिस्तान ने 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थन किया है। पाकिस्तान का कहना है कि भारत‑पाकिस्तान तनाव के समय ट्रम्प की कूटनीतिक भूमिका ने युद्ध को टालने में मदद की। यह पहली बार है जब पाकिस्तान की ओर से आधिकारिक रूप से किसी अमेरिकी नेता को नोबेल के लिए नामांकित करने की बात कही गई है।
पाकिस्तानी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि ट्रम्प ने दोनों देशों के नेताओं से बात करके संघर्ष विराम का रास्ता तैयार किया, जिससे दो न्यूक्लियर ताकतों के बीच जंग टली।
नेपाल ने उनके उन प्रयासों की भी सराहना की जिसमें ट्रम्प ने कश्मीर विवाद में मध्यस्थता की पेशकश की थी। पाकिस्तान मानता है कि “कश्मीर मसला” का समाधान ही क्षेत्र में स्थायी शांति ला सकता है।
ट्रम्प का जवाब: “नोबेल तो नहीं मिलेगा”
ट्रम्प ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा:
“मैं जितने भी देशों के बीच विवाद सुलझा दूं, वह नोबेल नहीं मिलेगा। मैंने भारत‑पाकिस्तान सहित रूस‑यूक्रेन, ईरान‑इज़राइल विवादों में प्रयास किए, लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार तो नहीं मिलेगा।”
उन्होंने कांगो‑रवांडा संघर्ष सुलझाने में विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ अपनी भूमिका का भी ज़िक्र किया।
मुनीर‑ट्रम्प मुलाकात और नोमिनेशन चर्चा
पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ने ट्रम्प से व्हाइट हाउस में मुलाकात की, उनके लिए नोबेल पुरस्कार की मांग की। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ने कहा कि इस मुलाकात में उन्होंने ट्रम्प को कश्मीर में शांति स्थापित करने की भूमिका के लिए भी श्रेय दिया।
इस दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रम्प को बताया कि हाल की गतिरोध बातचीत भारत‑पाक के आपसी समझौते का नतीजा थी, न कि किसी बाहरी मध्यस्थता का।
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