ढाका, वायरल सच (ब्यूरो): म्यांमार के रखाइन राज्य में तेज होती सैन्य झड़पों के बीच बांग्लादेश-म्यांमार सीमा पर तनाव लगातार बढ़ रहा है। सीमा से लगे टेकनाफ और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आशंका है कि हिंसा के कारण रोहिंग्या शरणार्थियों की एक नई लहर बांग्लादेश की ओर रुख कर सकती है।
स्थानीय निवासियों और रखाइन में रह रहे अपने परिजनों के संपर्क में रहने वाले रोहिंग्या शरणार्थियों के अनुसार, पिछले दो दिनों से सीमा पार लगातार भारी गोलीबारी और विस्फोटों की आवाजें सुनाई दे रही हैं। जानकारी के अनुसार, म्यांमार की सेना ने मौंगडाव, बुथिडांग और अराकान आर्मी के नियंत्रण वाले अन्य इलाकों में सैन्य अभियान तेज कर दिए हैं।
सीमावर्ती शाह पोरिर द्वीप के निवासी शाह आलम ने बताया कि विस्फोट इतने शक्तिशाली थे कि घर भूकंप जैसी तीव्रता से हिलने लगे। हालांकि, बांग्लादेशी अधिकारियों ने उन खबरों की पुष्टि नहीं की है, जिनमें बड़ी संख्या में रोहिंग्या के नाफ नदी के किनारे बांग्लादेश में प्रवेश का इंतजार करने का दावा किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि सीमा पर स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
कॉक्स बाज़ार के बालूखाली शरणार्थी शिविर के एक रोहिंग्या सामुदायिक नेता ने बताया कि मौंगडाव में हालात बेहद गंभीर हैं और कई परिवार सुरक्षित स्थानों की तलाश में हैं।
बांग्लादेश में पहले से ही 10 लाख से अधिक रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं, जो म्यांमार में वर्षों से जारी हिंसा, विशेषकर 2017 के बड़े पलायन के दौरान अपने घर छोड़कर आए थे। ऐसे में रखाइन में फिर से बढ़ती हिंसा ने सीमा सुरक्षा और संभावित नए शरणार्थी संकट को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
टेकनाफ उपज़िला प्रशासन ने कहा है कि अब तक किसी नई घुसपैठ की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने नाफ नदी और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी है।
इस बीच, म्यांमार की सीमा पर बढ़ते संघर्ष का असर थाईलैंड पर भी पड़ा है। म्यांमार की सेना और करेन नेशनल लिबरेशन आर्मी के बीच संघर्ष के दौरान सीमा पार से हुई गोलीबारी में थाईलैंड के टाक प्रांत में कुछ घर क्षतिग्रस्त हो गए। इसके बाद थाई प्रशासन ने सभी सीमा पार मार्ग अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए हैं और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं।