नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो) : भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से रुकी हुई द्विपक्षीय व्यापार समझौता (Bilateral Trade Agreement – BTA) वार्ता सोमवार देर शाम से वॉशिंगटन डीसी में फिर से शुरू हो रही है। यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के बीच कृषि, डेयरी और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों में शुल्क (टैरिफ) को लेकर मतभेद गहराए हुए हैं।
वार्ता की पृष्ठभूमि और रणनीतिक महत्व
भारत और अमेरिका दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं और इनके बीच व्यापारिक सहयोग पिछले एक दशक में लगातार बढ़ा है। हालांकि, व्यापार घाटा, शुल्क विवाद, और नॉन-टैरिफ बैरियर्स जैसे मुद्दों पर मतभेद समय-समय पर उभरते रहे हैं।
इस साल की शुरुआत में, 26 जून से 2 जुलाई तक एक राउंड की बातचीत वॉशिंगटन में हुई थी, जहां अमेरिका ने भारत से कृषि और डेयरी उत्पादों पर आयात शुल्क में रियायत की मांग की थी। भारत ने इस मांग को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि देसी डेयरी सेक्टर की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है।
वार्ताकारों की भूमिका और प्रतिनिधिमंडल की संरचना
इस बार वार्ता के लिए भारतीय वाणिज्य मंत्रालय की टीम पहले ही वॉशिंगटन पहुंच गई है।
- मुख्य वार्ताकार: राजेश अग्रवाल (विशेष सचिव, वाणिज्य विभाग)
- उप-मुख्य वार्ताकार: वॉशिंगटन में पहले से मौजूद हैं और वार्ता की रूपरेखा तय कर रहे हैं।
वार्ता चार दिन तक चलेगी और इसका उद्देश्य विवादास्पद मुद्दों को हल कर व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना है।
प्रमुख मुद्दे: कृषि, डेयरी और ऑटोमोबाइल क्षेत्र
- कृषि क्षेत्र:
अमेरिका भारतीय कृषि बाजार तक आसान पहुंच चाहता है, लेकिन भारत में छोटे किसानों की आजीविका के मद्देनजर यह एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। - डेयरी क्षेत्र:
भारत ने अभी तक किसी भी व्यापारिक साझेदार को डेयरी उत्पादों पर शुल्क में छूट नहीं दी है। अमेरिका इस सेक्टर में बाजार खोलने पर जोर दे रहा है, जिसे भारत राष्ट्रीय हित से जुड़ा मामला मानता है। - ऑटोमोबाइल क्षेत्र:
भारत अमेरिका से आयातित लग्जरी कारों पर भारी शुल्क लगाता है, जबकि अमेरिका चाहता है कि इसमें छूट दी जाए। अमेरिकी टैरिफ नीति पर भारत की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत सहित कई देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव 1 अगस्त तक के लिए टाल दिया है। इससे वार्ता को एक सकारात्मक वातावरण मिला है, लेकिन अगर समझौता नहीं होता, तो इन टैरिफ को लागू किया जा सकता है।
भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी व्यापार समझौता राष्ट्रीय हितों से समझौता करके नहीं किया जाएगा।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंध: आँकड़ों में
- 2023-24 में द्विपक्षीय व्यापार: लगभग 192 बिलियन अमेरिकी डॉलर
- भारत अमेरिका का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है
- अमेरिका भारत में टॉप FDI स्रोतों में शामिल है
- सेवाओं, टेक्नोलॉजी, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में बढ़ते निवेश
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ताएं कभी आसान नहीं रही हैं। परंतु दोनों देशों के हित एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं — खासकर इंडो-पैसिफिक रणनीति, सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन, और चीन को संतुलित करने के बड़े परिप्रेक्ष्य में।
यदि कृषि और डेयरी सेक्टर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर रचनात्मक समाधान निकलता है, तो यह समझौता दोनों देशों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
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