नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो) : देश की आर्थिक स्थिति से जुड़े एक महत्वपूर्ण संकेतक थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित थोक महंगाई दर जून 2025 में घटकर -0.13 प्रतिशत पर आ गई है। यह बीते 20 महीनों में दर्ज किया गया सबसे निचला स्तर है। पिछले महीने मई 2025 में यह दर 0.39% थी, जबकि जून 2024 में यह 3.43% के स्तर पर थी।
थोक महंगाई दर में गिरावट: क्या हैं प्रमुख कारण?
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, थोक महंगाई दर में यह गिरावट कई आर्थिक कारकों की वजह से देखने को मिली है। इनमें प्रमुख कारण हैं:
1. खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट
- जून 2025 में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 3.75% की गिरावट दर्ज की गई।
- मई 2025 में यह गिरावट 1.56% थी।
- सबसे बड़ी गिरावट सब्जियों की कीमतों में देखी गई, जो 22.65% तक कम हो गईं।
इसका अर्थ यह है कि किसान स्तर पर खाद्य वस्तुओं की लागत में कमी आई है, जिसका असर थोक बाजारों और अंततः उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा।
2. विनिर्मित उत्पादों की लागत में कमी
- विनिर्मित वस्तुओं की महंगाई दर जून में 1.97% रही, जो मई में 2.04% थी।
- इस सेक्टर में कीमतों में कमी का मतलब है कि औद्योगिक कच्चे माल, मशीनरी, धातुओं आदि की लागत घटी है, जो उद्योगों के लिए राहत की बात है।
3. ईंधन और बिजली क्षेत्र में स्थिरता
- ईंधन और बिजली की महंगाई दर जून में 2.65% दर्ज की गई, जो मई में 2.27% थी।
- पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में स्थिरता के चलते थोक स्तर पर दबाव कम हुआ है।
रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति में बदलाव
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने पिछले महीने नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) में 0.50% की कटौती करते हुए इसे 5.50% कर दिया था। यह कदम मुद्रास्फीति में नरमी के रुझान को देखते हुए लिया गया था।
खुदरा महंगाई अनुमान 2025-26:
- Q1 (अप्रैल-जून): 2.9%
- Q2: 3.4%
- Q3: 3.9%
- Q4: 4.4%
RBI ने अपने बयान में कहा था कि घरेलू मांग स्थिर बनी हुई है और महंगाई नियंत्रण में है, जिससे ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश बनी।
थोक महंगाई और खुदरा महंगाई का अंतर
- थोक महंगाई दर (WPI) उत्पादकों और आपूर्तिकर्ताओं की लागत को दर्शाती है।
- खुदरा महंगाई दर (CPI) उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जा रही कीमतों को मापती है।
- यदि थोक स्तर पर महंगाई में गिरावट आती है, तो भविष्य में खुदरा स्तर पर भी कीमतों में नरमी देखने को मिल सकती है।
किसे मिलेगा फायदा?
- उपभोक्ताओं को: खाद्य वस्तुओं और अन्य रोज़मर्रा की चीजों की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद।
- उद्योगों को: कच्चे माल की कीमतों में कमी से उत्पादन लागत घटेगी।
- सरकार को: राजकोषीय संतुलन और आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
- रिजर्व बैंक को: नीति दरों में लचीलापन रखने की गुंजाइश मिलेगी।
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