Home Delhi NCR PM Modi- भारत में Innovation की पुरानी परंपरा, आत्मनिर्भर टेक्नोलॉजी बनाना लक्ष्य

PM Modi- भारत में Innovation की पुरानी परंपरा, आत्मनिर्भर टेक्नोलॉजी बनाना लक्ष्य

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नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो): PM Modi ने कहा कि भारत में ज्ञान, खोज और Innovation की समृद्ध परंपरा रही है। शून्य की खोज से लेकर नंबर सिस्टम और खगोल विज्ञान तक भारत ने दुनिया को महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं। अब देश अपनी वैज्ञानिक विरासत को आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ाते हुए भविष्य की टेक्नोलॉजी विकसित करने और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में काम कर रहा है।

PM Modi ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित Emerging Science, Technology and Innovation Conclave 2026 का उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल दूसरे देशों में विकसित तकनीकों को अपनाना नहीं, बल्कि ऐसी नई तकनीकें बनाना है, जो भारत के साथ-साथ दुनिया की समस्याओं का समाधान भी कर सकें।

शून्य से आधुनिक तकनीक तक भारत की वैज्ञानिक यात्रा

PM Modi ने कहा कि भारत की परंपरा ज्ञान और खोज पर आधारित रही है। शून्य की खोज, नंबर सिस्टम और खगोल विज्ञान में भारत के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश अब इसी वैज्ञानिक विरासत को आधुनिक तकनीक और नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ा रहा है।

PM Modi के अनुसार, पहले भारत को दूसरे देशों में विकसित तकनीक अपनाने के लिए इंतजार करना पड़ता था। अब देश की सोच बदल रही है और वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं तथा युवाओं को नई तकनीक विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत को भविष्य की तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ उनमें नेतृत्व भी करना चाहिए। देश की क्षमता ऐसी होनी चाहिए कि वह वैश्विक चुनौतियों के समाधान तैयार कर सके।

आत्मनिर्भरता के लिए Research और Innovation पर जोर

PM Modi ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत का लक्ष्य मजबूत वैज्ञानिक अनुसंधान, नई खोजों और तकनीकी नवाचार पर निर्भर करता है। उनके अनुसार, देश को उन महत्वपूर्ण तकनीकों में अपनी क्षमता बढ़ानी होगी, जिनके लिए अभी दूसरे देशों पर निर्भरता चुनौती बन सकती है।

उन्होंने सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, अंतरिक्ष, स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत सामग्री और अगली पीढ़ी के संचार माध्यमों को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया।

PM Modi ने वैज्ञानिकों, उद्योग जगत, स्टार्टअप संस्थापकों और युवा विद्यार्थियों से अगले तीन वर्षों के लिए ठोस लक्ष्य तय करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों में नई तकनीक, प्रोटोटाइप, पायलट प्रोजेक्ट या उत्पाद विकसित करने की दिशा में स्पष्ट योगदान होना चाहिए।

परमाणु ऊर्जा और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों पर फोकस

PM Modi ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर परमाणु ऊर्जा की जरूरत होगी। उन्होंने परमाणु ईंधन के आयात पर निर्भरता को चुनौती बताते हुए देश में Fast Breeder Reactor Technology को आगे बढ़ाने की बात कही।

उन्होंने 500 मेगावाट के स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के फर्स्ट क्रिटिकलिटी चरण को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। इसके अलावा, उन्होंने अंतरिक्ष कार्यक्रम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में देश की क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया।

विज्ञान का लाभ आम लोगों तक पहुंचना जरूरी

PM Modi ने कहा कि विज्ञान और तकनीक की असली सफलता तभी है, जब उसका लाभ प्रयोगशालाओं से निकलकर आम लोगों तक पहुंचे। उन्होंने स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, रोजगार और आपदा प्रबंधन में उपयोगी समाधान विकसित करने की जरूरत बताई।

उन्होंने भारतीय स्टार्टअप और कंपनियों के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में ब्रेन एक्टिविटी समझने वाली तकनीक, स्वदेशी वायरलेस और सैटेलाइट संचार समाधान तथा सेमीकंडक्टर तकनीक पर काम हो रहा है।

PM Modi ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग में सुरक्षा और सावधानी को भी जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि AI तेजी से जवाब दे सकता है, लेकिन उसकी जानकारी को सत्यापित करना आवश्यक है। साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण प्रणालियों की सुरक्षा के लिए नई तकनीक विकसित करने पर भी ध्यान देना होगा।

विकसित भारत के लिए वैज्ञानिक सोच का आह्वान

PM Modi ने कहा कि भारत के युवाओं में प्रतिभा और कुछ नया करने का संकल्प है। जरूरत ऐसी पीढ़ी तैयार करने की है, जो उभरती हुई तकनीकों में केवल भागीदारी न करे, बल्कि उनके विकास में नेतृत्व भी निभाए।

उन्होंने उम्मीद जताई कि Science Conclave केवल विचारों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे मापने योग्य परिणाम सामने आएंगे। उनके मुताबिक, भारत को ऐसी तकनीकें विकसित करनी चाहिए, जो देश की जरूरतों को पूरा करने के साथ वैश्विक समस्याओं के समाधान में भी योगदान दें।

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