गुरुग्राम: डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, रोड स्वीपिंग, वाहनों व मैनपावर का पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य

पोर्टल आधारित रिपोर्ट के अनुसार होगा भुगतान

– एसडब्ल्यूएम मॉनिटरिंग पोर्टल से ठोस कचरा प्रबंधन कार्यों की होगी प्रभावी निगरानी

गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो): नगर निगम गुरुग्राम ने शहर में ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, रोड स्वीपिंग, कचरा परिवहन से जुड़े सभी वाहनों और मैनपावर का एसडब्ल्यूएम (Solid Waste Management) मॉनिटरिंग पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा। भविष्य में केवल पोर्टल पर दर्ज कार्यों और रिपोर्ट के आधार पर ही संबंधित एजेंसियों को भुगतान किया जाएगा।

इसी उद्देश्य से नगर निगम गुरुग्राम कार्यालय में शहरी स्थानीय निकाय विभाग, हरियाणा द्वारा संचालित एसडब्ल्यूएम मॉनिटरिंग पोर्टल के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। निगमायुक्त प्रदीप दहिया की अध्यक्षता में आयोजित इस प्रशिक्षण में अतिरिक्त निगमायुक्त, संयुक्त आयुक्त, वरिष्ठ सफाई निरीक्षक, सफाई निरीक्षक, सहायक सफाई निरीक्षक, सफाई सुपरवाइजर तथा ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने पोर्टल की कार्यप्रणाली, पंजीकरण प्रक्रिया और ऑनलाइन निगरानी एवं मूल्यांकन की विस्तृत जानकारी दी। एजेंसियों को निर्देश दिए गए कि वे अपने सभी डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, रोड स्वीपिंग, कचरा परिवहन से जुड़े वाहनों और मैनपावर का अनिवार्य रूप से पोर्टल पर पंजीकरण करें तथा उन्हें क्षेत्रवार कार्य आवंटित करें।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में केवल उन्हीं वाहनों और कर्मचारियों का भुगतान किया जाएगा, जिनका पंजीकरण पोर्टल पर होगा तथा जिनके कार्य का रिकॉर्ड पोर्टल पर उपलब्ध रहेगा। यदि कोई वाहन या मैनपावर निर्धारित क्षेत्र से बाहर कार्य करता पाया गया या पोर्टल पर रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हुआ, तो संबंधित कार्य का भुगतान नहीं किया जाएगा

निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने कहा कि एसडब्ल्यूएम मॉनिटरिंग पोर्टल से सफाई कार्यों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी। इससे यह स्पष्ट रहेगा कि किस क्षेत्र में कौन-सा वाहन और कितनी मैनपावर कार्य कर रही है तथा कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हो रहा है या नहीं। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से संसाधनों का बेहतर उपयोग, कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिकों को बेहतर स्वच्छता सेवाएं सुनिश्चित की जा सकेंगी।

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