चंडीगढ़, वायरल सच (ब्यूरो): हरियाणा सरकार ने प्रदेश के विभिन्न शहरों के ड्राफ्ट डेवलपमेंट प्लान तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हरियाणा सिविल सचिवालय में आयोजित स्टेट लेवल कमेटी (SLC) की बैठक में नारायणगढ़-2031, कुरुक्षेत्र-2041, नारनौल-2041 और पानीपत-2041 की विकास योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास योजनाओं को भविष्य की जनसंख्या, आधुनिक शहरी आवश्यकताओं, पर्यावरण संरक्षण, बेहतर परिवहन व्यवस्था और टिकाऊ शहरी विकास को ध्यान में रखते हुए अंतिम रूप दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP), बिजलीघर, एंटरटेनमेंट जोन और अन्य आवश्यक सार्वजनिक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
नारायणगढ़-2031 योजना
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2031 तक अनुमानित 95 हजार आबादी को ध्यान में रखते हुए नारायणगढ़ में 6 नए रिहायशी सेक्टर विकसित किए जाएंगे। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग-72 के आसपास विकास, औद्योगिक क्षेत्र, ग्रीन जोन और प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था को भी योजना में शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने औद्योगिक और आवासीय क्षेत्रों के बीच पर्याप्त दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए।
कुरुक्षेत्र-2041 योजना
मुख्यमंत्री ने आइकॉनिक डेस्टिनेशन स्कीम के तहत प्रस्तावित 250 एकड़ भूमि के लिए पर्याप्त क्षेत्र आरक्षित करने को कहा। इसके अलावा सरस्वती नदी के कैचमेंट एरिया में बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए।
नारनौल-2041 योजना
नारनौल विकास योजना के तहत 20 नए रिहायशी सेक्टर विकसित किए जाएंगे। साथ ही इंटीग्रेटेड मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब (IMLH) के अनुरूप औद्योगिक क्षेत्र, नए बाईपास तथा आवासीय, परिवहन और हरित क्षेत्रों के संतुलित विकास पर विशेष जोर दिया गया।
पानीपत-2041 योजना
पानीपत की बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए नए आवासीय क्षेत्र, सड़क नेटवर्क, एसटीपी, बूस्टिंग स्टेशन और अन्य शहरी सुविधाओं के विस्तार पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने पानीपत-शामली राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर एक-एक किलोमीटर तक औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने तथा उद्योगों के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन विकास योजनाओं का उद्देश्य संतुलित, आधुनिक और टिकाऊ शहरी विकास सुनिश्चित करना है, ताकि भविष्य में प्रदेशवासियों को मूलभूत सुविधाओं की किसी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े।
