गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो) : गुरुग्राम बलात्कार फर्जी केस को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसमें RTI के अनुसार 1 जनवरी 2020 से 31 दिसंबर 2024 तक दर्ज कुल 955 बलात्कार मामलों में से 417 (43.6%) मामले शादी के झूठे वादे पर आधारित थे, जिन्हें बाद में बलात्कार का रूप दिया गया। इनमें से 236 आरोप निराधार पाए गए और केस रद्द किए गए।
आईपीसी 376 के दुरुपयोग में गुरुग्राम का ट्रेंड
- 417 शादी‑वादे के आरोपों में से मामले ब्लैकलिस्टेड हो कर 236 आरटीआई द्वारा रद्द कर दिए गए।
- 96 मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू हुई—बाकी मामलों को निरस्त किया गया।
- पुलिस ने कहा कि अधिकांश दावे आपसी सहमति वाले रिश्तों के टूटने के बाद किए गए, ताकि शर्मिंदगी के जवाब में बदला लिया जा सके।
पुरुष अधिकार कार्यकर्ता की चेतावनी
पुरुष अधिकार कार्यकर्ता दीपिका नारायण भारद्वाज ने बताया:
“सहमति से बने रिश्तों के टूटने पर, उसे शादी के झूठे वादे और बलात्कार के रूप में इस्तेमाल करना अभिव्यक्ति के दुरुपयोग के अलावा कुछ नहीं है। इसका असर वास्तविक पीड़ितों और न्याय व्यवस्था पर भारी है।”
- उन्होंने एक उदाहरण दिया—एक महिला ने एक साल में 9 विभिन्न पुरुषों पर शादी-झूठ और बलात्कार के आरोप लगाए!
- इसके अलावा एक हनीट्रैप गिरोह का पर्दाफाश हुआ जिसमें एक पुलिस अधिकारी भी शामिल था और गिरफ्तार भी किया गया।
आधिकारिक निर्देश और कार्रवाई
19 जून 2024 को हरियाणा डीजीपी ने सभी पुलिस आयुक्तों और SP साहब को एक समझौता ज्ञापन जारी किया था, जिसमें:
- झूठे बलात्कार आरोपों की पहचान
- आरोप लगाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई
- न्याय-व्यवस्था को अनावश्यक बोझ से बचाना
इन सुझावों का ज़िक्र था।
कानूनी फ्रेमवर्क: धारा 376 और धारा 182
- आईपीसी धारा 376—बलात्कार के आरोप
- धारा 182—झूठे केस दर्ज करने वालों के लिए दंड
लेकिन इनमें से विनियमित अनुप्रयोग मात्र 40% मामलों में ही देखा गया, जिससे अभिनव न्याय की अनुपस्थिति स्पष्ट होती है।
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