गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो) : एक बेटे के पिता सूबेदार नरेश कुमार यादव पंजाब के पठानकोट में शहीद हो गए। वे गुरुग्राम जिला के गांव डाबोदा के रहने वाले थे। अभी तक उनका पार्थिव शरीर गांव नहीं पहुंचा है। उनकी शहादत कैसे हुई, इस बारे में भी अभी तक पता नहीं चल पाया है। दो महीने पहले ही वे छुट्टी पूरी करके वापस ड्यूटी पर गए थे।
जानकारी के अनुसार डाबोदा गांव निवासी नरेश कुमार यादव 27 साल पहले सेना में भर्ती हुए थे। अगले साल यानी 2026 में उनकी सेवानिवृत्ति होनी थी। नरेश कुमार यादव के पिता हरपाल सिंह किसान हैं। मां गृहिणी हैं, उनकी दो बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। उनका 18 साल का एक बेटा है, जो पढ़ाई कर रहा है। उनकी पत्नी दिल्ली यूनिवर्सिटी में क्लर्क है। नरेश कुमार यादव की शहादत की खबर सुनकर पूरे गांव में शौक की लहर है। हर गली, हर मुहल्ले में उनके ही चर्चे हो रहे हैं। गांव में उनका पार्थिक शरीर नहीं पहुंचा है। गांव के रहने वाले सुरेंद्र यादव के मुताबिक नरेश बहुत ही शांत स्वभाव के व्यक्तित्व के धनी थे। देश सेवा का उनमें जज्बा था। वे अपने इस दायित्व की पूरी निष्ठा से पूर्ति करते रहे। अगले साल उनकी सेवानिवृत्ति होनी थी। उनकी शहादत पर गांव को गर्व तो है, लेकिन उनके जाने का दुख भी बहुत ज्यादा है।
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