गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो) : हरियाणा के गुरुग्राम जिले के बिलासपुर थाना क्षेत्र में इंसानियत को झकझोर देने वाली वारदात सामने आई है। फतेहपुर गांव से शनिवार शाम लापता हुए सात साल के बच्चे आशीष का शव रविवार सुबह केएमपी एक्सप्रेसवे के पास कलवाड़ी गांव में पड़ा मिला। बच्चे की बेरहमी से चाकू से करीब 16 बार वार कर हत्या की गई थी। इस जघन्य अपराध के पीछे रंजिश की आशंका जताई जा रही है।
काम पर गए थे माता-पिता, उसी दौरान हुआ अपहरण
मृतक आशीष मूल रूप से राजस्थान के अलवर का रहने वाला था, लेकिन उसके माता-पिता मौजूदा समय में गुरुग्राम के फतेहपुर गांव में किराये पर रहते हैं। दोनों पथरेड़ी गांव की एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। शनिवार को मां माया दिन की शिफ्ट में गई थीं और पिता कमल रात की ड्यूटी के लिए तैयार हो रहे थे। उसी दौरान बच्चा अचानक गायब हो गया।
करीब दो घंटे तक दोनों ने मिलकर अपने बेटे की तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद पिता ड्यूटी पर चला गया। अगले दिन सुबह राहगीरों ने कलवाड़ी गांव के पास केएमपी एक्सप्रेसवे के नजदीक बच्चे का शव पड़ा देखा और पुलिस को सूचना दी।
पिता ने की शिनाख्त, शरीर पर मिले गंभीर चोटों के निशान
सूचना पाकर तावडू पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन मामला बिलासपुर थाना क्षेत्र का होने के कारण संबंधित पुलिस को सौंपा गया। इसी दौरान ड्यूटी से लौट रहे पिता कमल को सूचना मिली कि एक बच्चे का शव मिला है। मौके पर पहुंचकर उन्होंने शव की शिनाख्त अपने बेटे आशीष के रूप में की। पोस्टमार्टम के दौरान आशीष के शरीर पर चाकू से किए गए करीब 16 घाव मिले, जो हत्या की निर्ममता को दर्शाते हैं।
पड़ोसी किशोर पर लगाया हत्या का आरोप
मृतक के पिता कमल ने पड़ोस में रहने वाले एक किशोर पर हत्या का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि दो महीने पहले उक्त किशोर ने उनके कमरे से मोबाइल चोरी किया था, जिसकी जानकारी आशीष ने उन्हें दी थी। उन्हें शक है कि इसी बात से नाराज होकर किशोर ने बदला लेने के लिए आशीष की हत्या कर दी।
पुलिस ने शुरू की जांच, आरोपी किशोर की तलाश जारी
जांच अधिकारी बीरेंद्र सिंह ने बताया कि बच्चे का शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है। परिजनों की शिकायत के आधार पर एक किशोर को संदिग्ध मानते हुए जांच की जा रही है। आरोपी की तलाश जारी है और जल्द ही पूछताछ कर मामले का खुलासा किया जाएगा।
समाज के लिए सवाल: क्या हमारे बच्चे सुरक्षित हैं?
इस वारदात ने न सिर्फ एक परिवार को तोड़ा है, बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। एक मासूम बच्चा, जो अभी जीवन की शुरुआत में था, रंजिश की भेंट चढ़ गया। सवाल यह उठता है कि क्या हमारे बच्चे वास्तव में सुरक्षित हैं? और क्या हमें अपने आसपास की छोटी-छोटी घटनाओं को नज़रअंदाज़ करने की बजाय गंभीरता से नहीं लेना चाहिए?
पुलिस की अपील
- अगर किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
- बच्चों को अकेला छोड़ने से पहले आसपास के माहौल की पूरी जांच-पड़ताल कर लें।
- बच्चों को आत्मरक्षा और सतर्कता की शिक्षा दें।
यह सिर्फ एक बच्चा नहीं था, एक भविष्य था।
इस मामले में न्याय की जल्द से जल्द उम्मीद की जा रही है, ताकि परिवार को कुछ हद तक सुकून मिल सके और समाज में एक कड़ा संदेश जाए कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
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