गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो) : गुरुग्राम के डीएलएफ फेज 1 से 5 के रिहायशी इलाकों में हो रहे अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। 7 अक्टूबर को इस बहुचर्चित मामले पर सुनवाई होने वाली है, जिसमें कोर्ट की तरफ से अवैध निर्माण को लेकर सीलिंग और तोड़फोड़ की कार्रवाई पर अहम फैसला आने की संभावना है।
यह विवाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फरवरी के आदेश के बाद तेज हुआ था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि डीएलएफ के रिहायशी इलाकों में चल रही गैरकानूनी व्यावसायिक गतिविधियों और अवैध निर्माण के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके बाद टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की इन्फोर्समेंट टीम ने व्यापक सर्वेक्षण कर 4500 से अधिक मकानों को चिन्हित किया, जिनमें अवैध निर्माण या व्यावसायिक गतिविधियां पाई गईं। विभाग ने इन मकानों को कारण बताओ नोटिस जारी किए, जिनका जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर 2111 मकानों के विरुद्ध रेस्टोरेशन आदेश दिए गए। साथ ही, विभाग ने इन मकानों के आक्यूपेशन सर्टिफिकेट रद्द करने और पानी, बिजली तथा सीवर कनेक्शन काटने की सिफारिश भी की है।
इस मामले में कई स्पेशल लीव याचिकाएं भी दाखिल की गई हैं, जिनमें डीएलएफ कुतुब एन्क्लेव आरडब्ल्यूए और फेज 3 व फेज 5 के निवासी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले 6 अप्रैल को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था, लेकिन सुनवाई की तारीख अब बदलकर 7 अक्टूबर कर दी गई है। इस सुनवाई में दोनों पक्षों की ओर से बहस होने की उम्मीद है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सरकार इस मामले में उदासीनता दिखा रही है और अभी तक कोई स्पष्ट नीति या समाधान नहीं निकाला गया है। गोल्फ कोर्स रोड जैसे इलाकों में बढ़ते ट्रैफिक दबाव के कारण ये क्षेत्र अब पूरी तरह से रिहायशी नहीं रह पाए हैं क्योंकि हजारों ऑफिस, क्लिनिक, बुटीक और स्टूडियो पहले से ही संचालित हैं। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि सरकार इन क्षेत्रों के लिए ‘मिक्स-यूज’ या ‘कमर्शियल’ नीति बनाए ताकि आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों का संतुलन कायम रखा जा सके।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अधिकारी अमित मधोलिया ने बताया कि कार्रवाई हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट एक्ट और बिल्डिंग कोड के तहत की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विभाग पूरी सख्ती से निर्देशों का पालन करेगा।
इस सुनवाई का परिणाम गुरुग्राम के आवासीय इलाकों के नियमन और भविष्य को तय करेगा, जिससे न केवल स्थानीय निवासियों को राहत मिल सकेगी बल्कि शहर के विकास और नियोजन में भी स्पष्टता आएगी।
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