फतेहाबाद, वायरल सच (ब्यूरो) : वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने शुक्रवार को प्रदेशभर के उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से धान की पराली प्रबंधन के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की। बैठक में कृषि विभाग के निदेशक राज नारायण कौशिक और प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के सदस्य सचिव प्रदीप डागर भी उपस्थित रहे। फतेहाबाद के उपायुक्त डॉ. विवेक भारती ने जिले में पराली प्रबंधन को लेकर की गई तैयारियों का विस्तृत ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोकथाम के लिए जिला, उपमंडल, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर निगरानी समितियां गठित की गई हैं। जिले के 31 गांवों को येलो जोन में चिह्नित किया गया है।
इनमें 50 किसानों पर एक नोडल अधिकारी और ग्रीन जोन के गांवों में 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इस प्रकार कुल 688 नोडल अधिकारी नियमित रूप से निगरानी और किसानों को जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं। उपायुक्त ने बताया कि जिले में इस वर्ष लगभग 74 एमटी धान अवशेष निकलने का अनुमान है। इसके प्रबंधन के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसमें 40 एमटी इन-सीटू प्रबंधन (खेत में ही अवशेष प्रबंधन), 30 एमटी एक्स-सीटू प्रबंधन (खेत से बाहर उपयोग) तथा 4 एमटी चारे के रूप में इस्तेमाल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने कहा कि जिले में पराली प्रबंधन के लिए पर्याप्त मशीनरी उपलब्ध कराई गई है। जिले में 166 बैलर मौजूद हैं, जिनमें से 96 बैलर इस वर्ष ही किसानों को उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अतिरिक्त 2102 सुपर सीडर पहले से ही किसानों के पास मौजूद हैं। इस साल भी 582 सुपर सीडर दिए गए हैं, जिनके माध्यम से पराली को सीधे मिट्टी में मिलाया जा रहा है। इस वर्ष इन-सीटू या एक्स-सीटू खेती करने वाले किसानों के लिए 1200 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
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