हिसार: गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय को ₹32 लाख का शोध प्रोजेक्ट, अल्जाइमर और पार्किंसंस की नई दवाओं पर होगा शोध

हिसार, वायरल सच (ब्यूरो): गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीजेयू) के फार्मास्युटिकल साइंसेज विभाग की शिक्षिका डॉ. समृद्धि को हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद (एचएसएचईसी) की ओर से 32 लाख रुपये का प्रतिष्ठित शोध प्रोजेक्ट स्वीकृत किया गया है। दो वर्ष की इस परियोजना के माध्यम से अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी गंभीर न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के लिए अधिक प्रभावी, सुरक्षित और किफायती दवाओं के विकास पर शोध किया जाएगा। इस परियोजना में डॉ. विक्रमजीत सिंह सह-मुख्य अन्वेषक के रूप में कार्य करेंगे।

परियोजना का शीर्षक ‘संभावित न्यूरो-थेराप्यूटिक्स के रूप में बेंजोथायजोल-थायजोल हाइब्रिड: एक एकीकृत सिंथेटिक, इन-विट्रो और कंप्यूटेशनल अध्ययन’ रखा गया है। इसके तहत ऐसे नए रासायनिक यौगिक विकसित किए जाएंगे, जो न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों से जुड़े प्रमुख एंजाइमों को नियंत्रित करने के साथ-साथ एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों के माध्यम से मस्तिष्क की कोशिकाओं की सुरक्षा भी कर सकें।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने इस उपलब्धि पर डॉ. समृद्धि और उनकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में उच्चस्तरीय शोध के लिए आधुनिक प्रयोगशालाएं, अत्याधुनिक उपकरण और उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना हरियाणा में मेडिसिनल केमिस्ट्री और वैज्ञानिक अनुसंधान को नई मजबूती प्रदान करेगी तथा राज्य को स्वदेशी और किफायती चिकित्सीय समाधानों के विकास में नई पहचान दिलाएगी।

डॉ. समृद्धि ने बताया कि अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौती हैं। शोध के दौरान ऐसे मल्टी-टारगेट एजेंट विकसित किए जाएंगे, जो एसिटाइलकोलिनेस्टरेज, ब्यूटिरिलकोलिनेस्टरेज और मोनोअमीन ऑक्सीडेज जैसे प्रमुख एंजाइमों पर प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें। साथ ही मॉलिक्यूलर डॉकिंग और आधुनिक कंप्यूटेशनल तकनीकों की सहायता से विकसित अणुओं की प्रभावशीलता और बाइंडिंग क्षमता का परीक्षण किया जाएगा।

सह-मुख्य अन्वेषक डॉ. विक्रमजीत सिंह ने कहा कि यह परियोजना आधुनिक मेडिसिनल केमिस्ट्री, कंप्यूटेशनल ड्रग डिजाइन और जैविक परीक्षणों के समन्वित दृष्टिकोण पर आधारित है। उनका विश्वास है कि यह शोध न केवल न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों के लिए प्रभावी एवं सुरक्षित दवाओं के विकास में मदद करेगा, बल्कि देश में स्वदेशी ड्रग डिस्कवरी को भी नई दिशा देगा।

शोधकर्ताओं के अनुसार, इस परियोजना से विकसित होने वाले स्वदेशी लीड कंपाउंड्स महंगी आयातित दवाओं पर निर्भरता कम करने में सहायक होंगे। साथ ही हरियाणा के शैक्षणिक और स्वास्थ्य क्षेत्र में दवा खोज की क्षमता को बढ़ावा मिलेगा तथा भविष्य में मरीजों के बेहतर उपचार और न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के बढ़ते बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

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