सिरसा, वायरल सच (ब्यूरो): भारतीय किसान एकता (बीकेई) के प्रधान लखविंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें किसानों, मजदूरों तथा ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करने में लगातार विफल रही हैं। उन्होंने कहा कि किसान केवल अपने हितों के लिए नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसलिए सरकारों को किसान विरोधी नीतियां छोड़कर किसानों के साथ न्याय करना चाहिए।
बुधवार को जिला मुख्यालय पर आयोजित रोष प्रदर्शन के दौरान लखविंद्र सिंह किसानों को संबोधित कर रहे थे। प्रदर्शन के बाद किसानों ने उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति और हरियाणा के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इससे पहले संयुक्त किसान मोर्चा और भारतीय किसान एकता की बैठक सिरसा की जाट धर्मशाला में आयोजित हुई, जहां से किसान रोष मार्च निकालते हुए लघु सचिवालय पहुंचे।
किसानों ने सरकार के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखीं। इनमें सभी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद, स्वामीनाथन आयोग की सी-2+50 प्रतिशत सिफारिशों को लागू करना, किसानों और मजदूरों का संपूर्ण कर्ज माफ करना, मुक्त व्यापार समझौतों को रद्द करना तथा बिजली संशोधन विधेयक-2025 और बीज विधेयक-2025 को वापस लेने की मांग शामिल है।
इसके अलावा किसानों ने प्राकृतिक आपदाओं से हुई फसल क्षति का पूर्ण मुआवजा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार, खरीफ-2026 के दौरान अल्प वर्षा, नहरी पानी और बिजली की कमी से प्रभावित धान, नरमा, कपास, ग्वार सहित सभी फसलों के लिए विशेष राहत पैकेज देने की मांग की। किसानों ने नहरों में टेल तक पानी पहुंचाने, निर्बाध बिजली आपूर्ति, डीएपी और यूरिया की कालाबाजारी रोकने, नकली बीज एवं कीटनाशकों पर कार्रवाई, लंबित फसल मुआवजा और बीमा क्लेम जारी करने, आवारा पशुओं एवं जंगली सूअरों से सुरक्षा, ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल की समस्याओं का समाधान, समय पर सरकारी खरीद और लंबित भुगतान व सब्सिडी जारी करने की मांग भी उठाई।
