नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो) : डाबर च्यवनप्राश बनाम पतंजलि विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद को कड़ा निर्देश देते हुए कहा है कि वह डाबर च्यवनप्राश के खिलाफ किसी भी प्रकार का भ्रामक या नकारात्मक विज्ञापन अब प्रसारित नहीं करेगी। कोर्ट का यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों और ब्रांड की साख की रक्षा की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
डाबर इंडिया लिमिटेड ने याचिका दायर कर आरोप लगाया कि बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद अपने विज्ञापनों के माध्यम से च्यवनप्राश के क्षेत्र में भ्रामक दावा कर रही है। पतंजलि द्वारा यह दिखाया जा रहा है कि उनका च्यवनप्राश ही असली और आयुर्वेदिक है, जबकि दूसरे उत्पाद जैसे डाबर, साधारण और कमज़ोर बताए जा रहे हैं।
कोर्ट की टिप्पणियां
- कोर्ट ने कहा कि डाबर एक प्रतिष्ठित ब्रांड है, और उसे झूठे दावों से बदनाम नहीं किया जा सकता।
- पतंजलि के खिलाफ दिसंबर 2024 में समन जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने एक ही सप्ताह में 6182 भ्रामक विज्ञापन प्रसारित किए।
- कोर्ट ने यह भी कहा कि जब मामला विचाराधीन है, तब इस तरह का विपणन युद्ध (Marketing War) अनुचित है।
डाबर के आरोप
- पतंजलि का दावा कि उनके च्यवनप्राश में 51 जड़ी-बूटियां हैं, झूठा है — असल में केवल 47 ही पाई गईं।
- डाबर ने यह भी आरोप लगाया कि पतंजलि के उत्पाद में पारा (Mercury) पाया गया, जो विशेष रूप से बच्चों के लिए हानिकारक हो सकता है।
- कंपनी ने यह भी कहा कि पतंजलि का प्रचार निगेटिव कैंपेनिंग है, जो ग्राहकों को गुमराह करता है।
बाबा रामदेव पर पहले भी लग चुके हैं आरोप
इससे पहले रूह अफज़ा मामले में भी बाबा रामदेव के विवादित बयानों पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फटकार लगाई थी। उस मामले में भी कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि “बाबा रामदेव किसी के नियंत्रण में नहीं हैं और अपनी ही दुनिया में रहते हैं।” बाद में बाबा रामदेव ने उस बयान से संबंधित सभी वीडियो हटाने का आश्वासन दिया था।
अगली सुनवाई कब?
अगली सुनवाई 14 जुलाई, 2025 को निर्धारित की गई है, जिसमें दोनों पक्षों को दस्तावेज़ों के साथ प्रस्तुत होना होगा।
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