फरीदाबाद में डिजिटल अरेस्ट कर 2.13 करोड़ की साइबर ठगी, जयपुर से खाताधारक गिरफ्तार

फरीदाबाद, वायरल सच (ब्यूरो): साइबर थाना बल्लभगढ़ पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2.13 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए ठगी में इस्तेमाल बैंक खाता उपलब्ध कराने वाले एक आरोपी को राजस्थान के जयपुर से गिरफ्तार किया है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से पीड़ित के 1.05 करोड़ रुपये समय रहते फ्रीज कराकर वापस उसके बैंक खाते में ट्रांसफर करा दिए गए।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान राकेश निवासी वार्ड देबरी, शिप्रा पथ, जयपुर (राजस्थान) के रूप में हुई है। उसे अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस मामले में अब तक 6 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने खाताधारक ऐश्वर्य वर्धन का बैंक खाता साइबर ठगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। इसी खाते में ठगी की रकम का एक हिस्सा आया था। आरोपी ने खाते में आई 5.10 लाख रुपये की राशि चेक के माध्यम से निकलवाकर एक अन्य व्यक्ति को सौंप दी। पूछताछ में उसने बताया कि वह जयपुर में रंग-रोगन का कार्य करता है।

साइबर थाना बल्लभगढ़ की टीम ने शिकायत मिलते ही बैंक खातों का तकनीकी विश्लेषण शुरू किया और विभिन्न बैंकों के साथ समन्वय कर 1.05 करोड़ रुपये की राशि तुरंत फ्रीज करा दी। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह पूरी रकम शिकायतकर्ता के खाते में वापस ट्रांसफर कर दी गई।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि ठगी की राशि पहले चार बैंक खातों में भेजी गई। इसके बाद पहली लेयर में करीब 1,400 बैंक खातों और तीसरी लेयर में लगभग 2,400 अन्य खातों में रकम ट्रांसफर कर मनी ट्रेल को छिपाने की कोशिश की गई। पुलिस अब पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य खाताधारकों और साइबर ठगों की पहचान कर कार्रवाई कर रही है।

शिकायत के अनुसार, 13 जनवरी 2026 को पीड़ित की पत्नी के मोबाइल पर एक कॉल आई, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताते हुए आधार कार्ड से जुड़े बैंक खाते के जरिए 20 लाख रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया। इसके बाद कॉल को कथित मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के पास ट्रांसफर कर दिया गया।

साइबर ठगों ने पति-पत्नी को लगातार वीडियो कॉल पर रखकर उन्हें घर से बाहर जाने और किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क करने से रोका। हर दो घंटे में वीडियो कॉल कर उनकी गतिविधियों पर नजर रखी गई और विभिन्न जांच एजेंसियों का अधिकारी बनकर गिरफ्तारी व कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हुए 2.13 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया। पुलिस मामले की गहन जांच कर पूरे साइबर नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

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