वाटिका ग्रुप पर ED की बड़ी कार्रवाई, CMD अनिल भल्ला और प्रमोटर गौतम भल्ला गिरफ्तार

गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो): प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रियल एस्टेट कंपनी वाटिका लिमिटेड के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल भल्ला और प्रमोटर गौतम भल्ला को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया है। दोनों को गुरुग्राम की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 3 अक्टूबर 2026 तक ED की रिमांड पर भेज दिया।

ED की कार्रवाई कथित तौर पर होमबायर्स और निवेशकों से जुड़ी धोखाधड़ी तथा आवासीय प्लॉटों की डिलीवरी नहीं होने के मामले की जांच के तहत हुई है।

सात ठिकानों पर ED की तलाशी

गिरफ्तारी से पहले ED के गुरुग्राम जोनल कार्यालय ने PMLA की धारा 17 के तहत सात परिसरों में तलाशी ली थी। एजेंसी के अनुसार, तलाशी के दौरान आरोपियों में से एक के आवासीय परिसर से मर्सिडीज-बेंज GLC 300 बरामद की गई।

इसके अलावा करीब 1.55 करोड़ रुपये मूल्य के 1.3 किलोग्राम से अधिक सोने और हीरे के आभूषण भी मिले। ED के मुताबिक करीब 3.04 करोड़ रुपये के बैंक खाते और FDR भी बरामद कर फ्रीज किए गए।ED

प्लॉट देने के नाम पर रकम लेने का आरोप

ED की जांच दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज FIRs से जुड़ी है। इन मामलों में वाटिका लिमिटेड और उसके प्रमोटर-डायरेक्टर अनिल भल्ला, गौतम भल्ला, गौरव भल्ला और अन्य के खिलाफ कथित धोखाधड़ी, रकम लेने के बाद आवासीय प्लॉटों की डिलीवरी नहीं करने और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं।

इन्हीं FIRs के आधार पर ED ने PMLA के तहत मामला दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।

260 करोड़ रुपये लिए, लेकिन प्लॉट की डिलीवरी नहीं

जांच के अनुसार, 2010 से 2012 के बीच सात खरीदार संस्थाओं ने वाटिका लिमिटेड को गुरुग्राम स्थित वाटिका इंडिया नेक्स्ट सेक्टर 84/85 और वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 सेक्टर 88A प्रोजेक्ट्स में आवासीय प्लॉट खरीदने के लिए करीब 260 करोड़ रुपये एडवांस के तौर पर दिए थे।

ED के मुताबिक 2014 और 2015 में प्लॉट-वाइज एग्रीमेंट किए गए। इसके बाद प्रोजेक्ट के लेआउट में बदलाव हुआ और पहले आवंटित प्लॉटों को रीनंबर और रीलोकेट किया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि प्रोजेक्ट की जमीन बाद में अन्य खरीदारों को भी आवंटित और बेची जाती रही।

140.73 करोड़ रुपये के प्लॉट अब भी नहीं मिले

ED के अनुसार, वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 में करीब 90 करोड़ रुपये में खरीदी गई 1.10 लाख वर्ग गज जमीन से संबंधित एक भी प्लॉट लगभग 14 साल बाद तक डिलीवर नहीं हुआ।

वहीं वाटिका इंडिया नेक्स्ट प्रोजेक्ट में भी प्लॉटों की डिलीवरी पूरी नहीं हुई। एजेंसी के अनुसार, करीब 140.73 करोड़ रुपये मूल्य के प्लॉट अभी भी अनडिलीवर्ड हैं।ED

अनिल और गौतम भल्ला की भूमिका जांच के घेरे में

ED के अनुसार, जांच में सामने आया कि अनिल भल्ला कथित तौर पर जांच के दायरे में आए लेन-देन से संबंधित महत्वपूर्ण फैसलों की निगरानी कर रहे थे।

एजेंसी के मुताबिक गौतम भल्ला ने महत्वपूर्ण समझौतों को निष्पादित किया और डायरेक्टर के रूप में उन संस्थाओं पर नियंत्रण बनाए रखा, जिनके पास प्रोजेक्ट की जमीन थी। जांच एजेंसी का कहना है कि दोनों समूह के संचालन और महत्वपूर्ण कारोबारी फैसलों से जुड़े रहे।

ED द्वारा जुटाए गए दस्तावेजों के आधार पर एजेंसी ने दावा किया है कि कई अहम फैसले दोनों के बीच संयुक्त रूप से लिए गए।

22 ग्रुप कंपनियों के जरिए जमीन रखने का दावा

जांच में ED को कथित तौर पर पता चला कि प्रोजेक्ट की जमीन करीब 22 ग्रुप कंपनियों के माध्यम से रखी गई थी। एजेंसी के अनुसार, इन कंपनियों में कर्मचारी नहीं थे और न ही इनकी कोई अलग व्यावसायिक गतिविधि थी।

ED का कहना है कि इन कंपनियों का मुख्य इस्तेमाल कॉर्पोरेट गारंटी और वित्तीय संस्थानों के पक्ष में लैंड बैंक को मॉर्गेज करने सहित जमीन के प्रबंधन के लिए किया जाता था।

प्रोजेक्ट की रकम दूसरी संस्थाओं में ट्रांसफर करने का आरोप

ED ने वाटिका लिमिटेड के बैंक खातों की भी जांच की। एजेंसी के मुताबिक, खातों के विश्लेषण में सामने आया कि खरीदारों से मिली रकम का इस्तेमाल केवल उन्हीं प्रोजेक्ट्स में नहीं किया गया, जिनके लिए यह राशि ली गई थी।

जांच के अनुसार, रकम का कुछ हिस्सा अन्य ग्रुप कंपनियों और प्रमोटर से जुड़ी संस्थाओं में ट्रांसफर किया गया, जो संबंधित परियोजनाओं का हिस्सा नहीं थीं।ED

473.18 करोड़ रुपये के लेन-देन की भी जांच

ED के अनुसार, वर्ष 2024 में स्केलर वेंचर्स ने एक ‘सेल एग्रीमेंट’ और ‘बाय-बैक एग्रीमेंट’ के तहत 473.18 करोड़ रुपये का भुगतान किया था।

जांच एजेंसी के मुताबिक 165 प्लॉटों में से केवल 15 प्लॉट वापस खरीदे गए। इसके बाद शेष 150 प्लॉटों में से 14 प्लॉट कथित तौर पर स्केलर की जानकारी या सहमति के बिना करीब 13.62 करोड़ रुपये में तीसरे पक्ष को बेच दिए गए।

ED के अनुसार, इस मामले में फिलहाल प्रमाणित अपराध की कमाई करीब 154.36 करोड़ रुपये है।

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