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हरियाणा में नलकूपों के पानी की होगी मुफ्त वैज्ञानिक जांच, किसानों को मिलेगी फसल चयन की वैज्ञानिक सलाह

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चंडीगढ़, वायरल सच (ब्यूरो): हरियाणा सरकार ने किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए प्रदेश के सभी नलकूपों और ट्यूबवेलों के पानी की मुफ्त वैज्ञानिक जांच कराने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पानी की गुणवत्ता की जांच की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए, ताकि किसानों को उनके खेत और उपलब्ध जल की गुणवत्ता के अनुरूप वैज्ञानिक सलाह समय पर मिल सके।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को चंडीगढ़ में बजट घोषणाओं, मुख्यमंत्री घोषणाओं और संकल्प पत्र की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में उन्होंने निर्देश दिए कि किसानों के पानी के नमूनों की जांच पूरी तरह निशुल्क की जाए और नमूने संबंधित प्रयोगशालाओं में जमा कराने की सरल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

पानी की जांच के दौरान कार्बोनेट, बाइकार्बोनेट, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, क्लोराइड सहित अन्य आवश्यक रासायनिक तत्वों और जल गुणवत्ता मानकों का परीक्षण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जांच रिपोर्ट केवल किसानों को उपलब्ध कराने तक सीमित न रहे, बल्कि उसके आधार पर यह भी बताया जाए कि उपलब्ध पानी के अनुसार कौन-सी फसलें उपयुक्त रहेंगी, किन फसलों की खेती से बचना चाहिए और जल गुणवत्ता के अनुसार कौन-सी कृषि पद्धति तथा पोषक तत्व प्रबंधन अपनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य “पानी की रिपोर्ट के आधार पर फसल चयन” की वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित करना है, जिससे किसान जल की गुणवत्ता के अनुसार सही फसल चुनकर उत्पादन बढ़ा सकें और खेती अधिक लाभकारी बना सकें।

बैठक में मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि एपीडा से प्रमाणित अथवा प्राकृतिक/जैविक खेती करने वाले किसानों को 10 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रतिवर्ष की प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाया जाए।

इसके अलावा प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को देसी गाय खरीदने के लिए 30 हजार रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की योजना को भी प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए, ताकि किसान गो-आधारित प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक संसाधन आसानी से जुटा सकें।

सरकार का मानना है कि इन पहलों से वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा मिलेगा, जल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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