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गुरुग्राम में पानी-सड़क पूरी नहीं हो रही, नए शहर को कहां से देंगे: राव इंद्रजीत सिंह

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गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो): केंद्रीय मंत्री एवं गुरुग्राम से सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने सरकार की नए शहर बसाने की योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब गुरुग्राम में ही पानी और सड़क की समस्याएं पूरी तरह दूर नहीं हो पा रही हैं, तो केएमपी पर प्रस्तावित चार नए शहरों को पानी कहां से उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि जलभराव और अव्यवस्था के कारण विदेशों तक गुरुग्राम की बदनामी हो रही है।

राव इंद्रजीत सिंह ने बुधवार को अधिकारियों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में गुरुग्राम में जलभराव, भूजल स्तर में गिरावट और बिल्डरों द्वारा नदी-नालों को बंद किए जाने की समस्या को गंभीर बताया। उन्होंने अधिकारियों के साथ वाटर हार्वेस्टिंग, वाटर स्टोरेज और नदी-नालों को साफ कर उनके मूल स्वरूप में लाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की।

उन्होंने भूजल दोहन के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2004 में गुरुग्राम में भूजल दोहन 145 प्रतिशत था, जो 2024 में बढ़कर 212.77 प्रतिशत हो गया है, जबकि राष्ट्रीय औसत करीब 60 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 में भूजल स्तर 18.8 मीटर था, जो 2025 में गिरकर 38.5 मीटर तक पहुंच गया।

अकाउंटिबिलिटी नहीं होगी तो डंडा उठाऊंगा

केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को जवाबदेही सुनिश्चित करने की चेतावनी देते हुए कहा कि सिस्टम में अकाउंटिबिलिटी की कमी है। उन्होंने कहा कि वह खुद इसकी मॉनिटरिंग करेंगे और अगर जवाबदेही नहीं होगी तो वह सख्त रुख अपनाएंगे।

राव इंद्रजीत सिंह ने वर्ष 2002 से 2012 के दौरान गुरुग्राम में हुए विकास में बिल्डरों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम आज भी हरियाणा को 60 प्रतिशत से अधिक राजस्व देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में लाइसेंस जारी करते समय यह नहीं देखा गया कि जमीन नदी-नालों से संबंधित है या नहीं।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 से 2014 तक जारी किए गए लाइसेंसों पर 2017-18 तक कॉलोनियां विकसित हुईं और इसी दौरान कई नदी-नाले बंद हो गए। रास्ते बंद होने से बारिश के पानी की निकासी प्रभावित हुई और जलभराव की समस्या बढ़ी।

जलभराव के समाधान के लिए योजनाएं

राव इंद्रजीत सिंह ने बताया कि दौलताबाद, खेड़कीमाजरा, चंदू, बुढ़ेड़ा और धनकोट जैसे जलभराव प्रभावित क्षेत्रों में इंजेक्शन ट्यूबवेल लगाए जाएंगे। इनके माध्यम से पानी को ट्रीट कर जमीन में भेजने की योजना है।

उन्होंने कहा कि निगम और सरकार की खाली जमीन पर वाटर बॉडी विकसित कर अरावली से आने वाले पानी को वहां लाने की योजना पर भी काम किया जाएगा। इसके अलावा गुरुग्राम में सैटेलाइट मैपिंग के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि पहले कितने नदी-नाले थे और वर्तमान में कितने बंद हो चुके हैं।

उन्होंने माना कि नदी-नालों पर बने अस्पतालों और अन्य संस्थानों जैसे मौजूदा निर्माणों को हटाना आसान नहीं होगा। ऐसे में इनके नीचे से पानी की निकासी के लिए वैकल्पिक तकनीकी समाधान तलाशे जाएंगे।

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