गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो) : गुरुग्राम में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है, जिससे शहरवासियों की सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है। आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ आम बात हो गई है। बुधवार को गुरुग्राम का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 223 दर्ज किया गया, जो “अत्यधिक अस्वस्थ” श्रेणी में आता है।
नगर निगम और जीएमडीए के प्रदूषण नियंत्रण उपाय ज्यादातर औपचारिकता तक सीमित हैं। सड़क पर पानी छिड़कना, वाहनों पर जुर्माना और कुछ निर्माण कार्यों पर अस्थायी रोक जैसी कार्रवाइयां प्रदूषण को नियंत्रित करने में पर्याप्त नहीं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थायी समाधान के बिना, हर साल वही स्थिति दोहराई जाएगी।
शहर के कचरे का केवल 65-70 प्रतिशत ही उठाया जा रहा है। लगभग 30 प्रतिशत कचरा सड़कों, नालों और खाली प्लॉटों में फेंका जाता है, जिसमें जलने योग्य कचरा और प्लास्टिक शामिल हैं, जो वायु प्रदूषण को बढ़ाते हैं। बंधवाड़ी लैंडफिल पर 14 लाख टन कचरा पड़ा हुआ है, जिससे जहरीली गैसें वातावरण में मिल रही हैं।
गुरुग्राम में केवल चार वायु गुणवत्ता मापन यंत्र काम कर रहे हैं, जिससे शहर की वास्तविक वायु गुणवत्ता का आंकड़ा अधूरा है। निर्माण स्थलों से उड़ती धूल और खुले में जलाया गया कचरा प्रदूषण को और गंभीर बना रहे हैं।
सफाई एजेंसियों को करोड़ों रुपये का भुगतान किया जा रहा है, लेकिन उनकी कार्यकुशलता और निगरानी कमजोर है। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) लागू है, लेकिन यह केवल कागजों तक ही सीमित रह गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में हर जोन में वायु गुणवत्ता मापन स्टेशन लगाना, सड़क किनारे मिट्टी को पक्का करना और कचरा सही तरीके से निस्तारित करना जरूरी है। नागरिक प्रशासन से तत्काल और स्थायी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं, ताकि गुरुग्राम में सांस लेना सुरक्षित बन सके।
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