गुरुग्राम स्कूल सील कार्रवाई: नगर निगम ने इंटरनेशनल दिल्ली पब्लिक स्कूल को किया सील

गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो): गुरुग्राम के बसई एन्क्लेव क्षेत्र में स्थित इंटरनेशनल दिल्ली पब्लिक स्कूल (IDPS) को नगर निगम द्वारा सील कर दिया गया है। यह कार्रवाई सोमवार को नगर निगम की टीम द्वारा की गई, जिसकी अगुवाई सहायक अभियंता आर. के. मोंगिया ने की। उनके साथ कनिष्ठ अभियंता वरुण और हरिओम तथा स्थानीय पुलिस बल भी मौजूद था, जिससे कि शांति व्यवस्था बनाए रखी जा सके।

नगर निगम का कहना है कि यह स्कूल बिना किसी वैध अनुमति और स्वीकृति के निर्माण किया गया था। कई बार नोटिस भेजे गए, मगर भवन मालिकों ने न तो कोई प्रतिक्रिया दी, न ही कोई जरूरी दस्तावेज जमा किए। ऐसे में यह कार्रवाई नगर नियोजन नियमों के तहत जरूरी हो गई थी।

पहले भी हुई थी सीलिंग, मगर तोड़ दी गई थी सील

आपको बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब इस स्कूल भवन को सील किया गया। 18 जून को भी इसे सील किया गया था, मगर कुछ दिनों बाद भवन मालिकों ने खुद ही सील को तोड़ दिया, जो कि एक गंभीर अपराध है। इस अवैध कृत्य को लेकर नगर निगम ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई और इसके बाद सख्त रुख अपनाते हुए दोबारा सीलिंग की कार्रवाई की गई।

नगर निगम के अधिकारियों ने यह भी बताया कि निर्माण स्थल पर ना तो बिल्डिंग प्लान पास करवाया गया था, और ना ही अन्य जरूरी मंजूरी ली गई थी। यह नगर निगम अधिनियम के सीधे उल्लंघन की श्रेणी में आता है।

अवैध निर्माण पर निगम का कड़ा संदेश

नगर निगम गुरुग्राम ने इस कार्रवाई के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया है कि अवैध निर्माण, खासकर स्कूल जैसे संस्थानों में, किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ये भवन न सिर्फ नियमों का उल्लंघन करते हैं बल्कि बच्चों और आम जनता की सुरक्षा को भी खतरे में डालते हैं।

नगर निगम ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि अगर उन्हें कहीं पर भी अवैध निर्माण, बिना अनुमति की इमारतें या अनधिकृत स्कूल भवन दिखाई दें, तो उसकी सूचना तत्काल निगम कार्यालय या संबंधित अधिकारी को दें। इससे शहर की योजना और संरचना को दुरुस्त बनाए रखने में मदद मिलेगी।

स्कूल प्रशासन पर सवाल

इस पूरी घटना ने स्कूल प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां स्कूल शिक्षा के केंद्र माने जाते हैं, वहीं दूसरी ओर अगर उन्हीं का निर्माण कानून तोड़कर किया जाए, तो यह एक चिंताजनक स्थिति बन जाती है।

ऐसे में यह मामला सिर्फ अवैध निर्माण का नहीं, बल्कि स्कूलों की प्रामाणिकता और जिम्मेदारी का भी है। अभिभावकों को भी जागरूक रहने की जरूरत है कि वे बच्चों के दाखिले से पहले स्कूल की अनुमति और कानूनी स्थिति की जानकारी जरूर लें।

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