हिसार, वायरल सच (ब्यूरो): गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUST) ने सामग्री विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग की प्रो. नीतू अहलावत के निर्देशन में शोधार्थी दीपा द्वारा तैयार शुद्ध सोडियम बिस्मथ टाइटनेट सिरेमिक का नया एक्स-रे डिफ्रैक्शन (XRD) पैटर्न दुनिया के प्रतिष्ठित इंटरनेशनल सेंटर फॉर डिफ्रैक्शन डेटा (ICDD) के PDF-5+ 2027 डेटाबेस में शामिल किया गया है।
इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मंच पर नई पहचान मिली है।
कुलपति ने शोध टीम को दी बधाई
प्रो. नीतू अहलावत और उनकी टीम ने इस उपलब्धि की जानकारी कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई के साथ साझा की। कुलपति ने प्रो. नीतू अहलावत, शोधार्थी दीपा और पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय पहचान को और मजबूत करेगी।
उन्होंने कहा कि इस तरह का उच्चस्तरीय वैज्ञानिक शोध विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षकों और शोधार्थियों को भी विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा।
दुनिया भर के शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी होगा डेटा
ICDD का PDF-5+ डेटाबेस विश्वसनीय क्रिस्टलोग्राफिक और एक्सआरडी डेटा के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय स्रोतों में शामिल है। किसी नए प्रयोगात्मक एक्सआरडी पैटर्न का इस डेटाबेस में शामिल होना शोध की गुणवत्ता, सटीकता और वैज्ञानिक महत्व का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है।
डेटाबेस में शामिल यह नया पैटर्न दुनिया भर के वैज्ञानिकों, शोध संस्थानों, प्रयोगशालाओं और उद्योगों के लिए उपयोगी रेफरेंस साबित होगा। इसके माध्यम से विभिन्न पदार्थों की पहचान और उनके वैज्ञानिक विश्लेषण में सहायता मिलेगी।
प्रो. नीतू अहलावत को मिली विशेष पहचान
प्रो. नीतू अहलावत उन चुनिंदा भारतीय शोध वैज्ञानिकों के समूह में शामिल हो गई हैं, जिनके प्रयोगात्मक XRD पैटर्न को ICDD के प्रतिष्ठित डेटाबेस में शामिल करने के लिए स्वीकार किया गया है।
विश्वविद्यालय के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे सामग्री विज्ञान में उसकी बढ़ती शोध क्षमता और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय में बढ़ती स्वीकार्यता सामने आती है।
कुलसचिव ने भी सराहा प्रयास
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. विजय कुमार ने भी प्रो. नीतू अहलावत और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक शोधकर्ता की सफलता नहीं है, बल्कि पूरे विश्वविद्यालय के लिए गौरव और एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
इस अवसर पर प्रो. नीतू अहलावत के साथ शोधार्थी दीपा, कनिका सांगवान, पूजा, दीपक सैनी, आरती और अचला रानी उपस्थित रहे।

