नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो) : Axiom-4 Mission की नई लॉन्च तारीख अब तय हो चुकी है। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए जाने वाले इस Axiom-4 मिशन को 25 जून को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा। इस ऐतिहासिक मिशन में भारत के पायलट कैप्टन शुभांशु शुक्ला भी अंतरिक्ष की यात्रा पर रवाना होंगे।
AXIOM-4 मिशन: 25 जून को होगा लॉन्च
नासा के अनुसार, Axiom-4 मिशन को अब 25 जून को भारतीय समय अनुसार 12:10 बजे लॉन्च किया जा सकता है। हालांकि, इस मिशन को पहले 29 मई को लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन तकनीकी खामी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया। इसके बाद मिशन की तारीखें बार-बार टलती गईं। लेकिन अब नासा ने इसका नया शेड्यूल जारी किया है।
एक्सिओम-4 मिशन का इतिहास: 6 बार टल चुका है लॉन्च
इस मिशन को अब तक 6 बार टाला जा चुका है। पहले 29 मई को लॉन्च होने वाला था, लेकिन मौसम की खराबी के कारण इसे 8 जून तक के लिए स्थगित कर दिया गया। फिर फाल्कन-9 रॉकेट के बूस्टर में लिक्विड ऑक्सीजन के रिसाव के कारण इसकी तारीख बदलकर 10 जून और फिर 11 जून कर दी गई। इसके बाद, तकनीकी समस्याओं के कारण इसे 19 जून और फिर 22 जून तक स्थगित किया गया। अब नासा ने इसे 25 जून को लॉन्च करने का अंतिम शेड्यूल तय किया है।
मिशन की लॉन्चिंग और डॉकिंग की जानकारी
NASA के अनुसार, Axiom-4 मिशन को 25 जून को पूर्वी डेलाइट टाइम (EDT) के अनुसार 2:31 बजे लॉन्च किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि भारत में इसे दोपहर 12:10 बजे लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन के लिए स्पेसएक्स का फाल्कन-9 रॉकेट और स्पेसएक्स ड्रैगन अंतरिक्ष यान का उपयोग किया जाएगा। अंतरिक्ष यान अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के साथ 26 जून को लगभग 7 बजे डॉक करेगा।
AXIOM-4 मिशन में कौन-कौन शामिल है?
यह मिशन एक निजी अंतरिक्ष यात्री मिशन है और इसमें कई अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। मिशन की कमान डॉ. पेगी व्हिटसन के हाथ में है, जो अमेरिका से हैं। इसके अलावा, पोलैंड से स्लावोज उज्नान्स्की-विस्निएव्स्की और हंगरी से टिबोर कापू मिशन विशेषज्ञ के तौर पर शामिल हैं। भारतीय पायलट कैप्टन शुभांशु शुक्ला को इस मिशन में पायलट के तौर पर चुना गया है। यह भारत के लिए गर्व की बात है क्योंकि एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री इस महत्वपूर्ण मिशन का हिस्सा बनेंगे।
क्या है Axiom-4 मिशन का महत्व?
Axiom-4 मिशन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह निजी क्षेत्र द्वारा संचालित एक अंतरिक्ष मिशन है, और इसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग का अहम योगदान है। इस मिशन का उद्देश्य अंतरिक्ष स्टेशन में नई तकनीकों और प्रयोगों का परीक्षण करना है, जो भविष्य में अंतरिक्ष अन्वेषण और विज्ञान के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री कई नए प्रयोग करेंगे, जो न केवल विज्ञान की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे, बल्कि यह भविष्य में मानवता के लिए अंतरिक्ष यात्रा को और भी आसान बनाएंगे।
भारत और भारतीयों के लिए गर्व की बात
भारत के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है क्योंकि कैप्टन शुभांशु शुक्ला इस मिशन में हिस्सा लेने वाले पहले भारतीय पायलट होंगे। इस मिशन से भारत का नाम अंतरिक्ष अन्वेषण में और भी मजबूती से जुड़ जाएगा। भारत के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए यह प्रेरणा का स्रोत होगा, और आने वाली पीढ़ी को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में और भी बेहतर योगदान देने की प्रेरणा मिलेगी।
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