Asian Games 2026: हॉकी में भारत की नजर स्वर्ण पर
नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो): हालिया विश्व कप में पुरुष टीम के आठवें और महिला टीम के पांचवें स्थान पर रहने के बाद भारतीय हॉकी अब Asian Games 2026 में नई चुनौती के लिए तैयार है। दोनों टीमों का लक्ष्य स्वर्ण पदक हासिल करना है। एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफिकेशन का रास्ता भी खोल सकता है।
विश्व कप की गलतियों को सुधारना होगा
विश्व कप में भारतीय डिफेंस उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया। अमित रोहिदास, जरमनप्रीत सिंह, सुमित, जुगराज सिंह, यशदीप सिवाच, संजय राणा और हरमनप्रीत सिंह जैसे खिलाड़ियों की रक्षापंक्ति से भारत को अपेक्षित मजबूती नहीं मिली।
पूरे विश्व कप में भारत ने 19 गोल गंवाए, जो टूर्नामेंट की पांचवीं सबसे कमजोर रक्षात्मक संख्या रही। पाकिस्तान के खिलाफ भी टीम ने तीन गोल खाए।
गोलकीपिंग और फॉरवर्ड लाइन में भी टीम को सुधार की जरूरत दिखाई दी। हालांकि, कप्तान हरमनप्रीत सिंह की पेनल्टी कॉर्नर पर ड्रैगफ्लिक भारतीय टीम के लिए सकारात्मक पहलू रही।
पुरुष टीम के सामने खिताब बचाने की चुनौती
हालांकि, Asian Games 2026 में लगातार दूसरी बार स्वर्ण जीतना आसान नहीं होगा। वर्ष 2006 के बाद से पुरुष हॉकी में कोई टीम लगातार दो संस्करणों में स्वर्ण पदक नहीं जीत सकी है। विश्व कप के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अब भारतीय टीम के लिए एशियाई खेल बेहद अहम बन गए हैं।
अभिषेक और अनुभवी खिलाड़ियों से उम्मीद
हरमनप्रीत के पेनल्टी कॉर्नर प्रदर्शन को फील्ड प्ले में फॉरवर्ड खिलाड़ियों को मजबूती देनी होगी। अभिषेक नैन 2023 के एशियाई खेलों के बाद से लगातार प्रभावी रहे हैं। उन्होंने 86 मैचों में 30 गोल किए हैं।
अनुभवी फॉरवर्ड मनप्रीत सिंह ने 69 मुकाबलों में 11 गोल किए हैं। टीम को इन खिलाड़ियों से आक्रमण में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद होगी।
फुल्टन ने चारों क्वार्टर में टीम के प्रदर्शन का स्तर समान नहीं रहने पर चिंता जताई थी। ओलंपिक क्वालीफिकेशन का महत्व देखते हुए टीम चयन में अनुभव को प्राथमिकता दी गई है। इसी कारण आदित्य लालगे की जगह राजकुमार पाल को टीम में शामिल किया गया है।
ग्रुप चरण में भारत को मेजबान जापान और दक्षिण कोरिया के खिलाफ शुरुआती मुकाबलों में अपनी तैयारी परखनी होगी। नॉकआउट चरण में पाकिस्तान या मलेशिया से सामना होने की संभावना भी बन सकती है।
महिला टीम को चीन से कड़ी चुनौती
महिला वर्ग में सजॉर्ड मारिजने की टीम एशियाई हॉकी में चीन के दबदबे को चुनौती देने के इरादे से उतरेगी। विश्व कप में पांचवें स्थान की उपलब्धि ने टीम का आत्मविश्वास बढ़ाया है।
युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के मिश्रण से बनी भारतीय टीम ने विश्व कप में मजबूत प्रदर्शन किया। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत ने कोई गोल नहीं खाया। चीन, दक्षिण अफ्रीका, नीदरलैंड्स और जर्मनी के खिलाफ चार मुकाबलों में टीम ने केवल छह गोल गंवाए।
खास बात यह रही कि भारत ने विश्व कप में जिन छह टीमों का सामना किया, उनमें से पांच की रैंकिंग उससे बेहतर थी।
नवनीत और दीपिका पर रहेंगी निगाहें
भारत के आक्रमण की जिम्मेदारी मुख्य रूप से नवनीत कौर और दीपिका पर होगी। दोनों फील्ड गोल के साथ पेनल्टी कॉर्नर में भी टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं।
ग्रुप चरण में अपेक्षाकृत कमजोर टीमों के खिलाफ मुकाबले भारत के अन्य फॉरवर्ड खिलाड़ियों को भी अपनी क्षमता दिखाने का अवसर देंगे।
गोलकीपिंग में भारत के पास सविता पूनिया और बिचु देवी जैसे मजबूत विकल्प हैं। पदक दौर में, विशेषकर चीन के खिलाफ संभावित मुकाबले में, दोनों की भूमिका निर्णायक हो सकती है।
विश्व कप में भारत ने चीन को 2-2 से बराबरी पर रोका था। हालांकि, रक्षापंक्ति की अनुभवहीनता के कारण शिल्पी दास की गलती से चीन को पेनल्टी स्ट्रोक मिला था।
44 साल का इंतजार खत्म करने की कोशिश
भारतीय महिला टीम इस बार 44 साल से चले आ रहे एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक के सूखे को समाप्त करना चाहेगी। अनुभवी मिडफील्डर नेहा ने टीम के इरादे स्पष्ट करते हुए स्वर्ण पदक जीतने का भरोसा जताया है।
मारिजने भी भारतीय टीम की मौजूदा प्रतिभाओं को लेकर आश्वस्त हैं। उनका मानना है कि मौजूदा समूह उनके पहले कार्यकाल की टीम से भी बेहतर क्षमता रखता है।
अब Asian Games 2026 में टीम को विश्व कप के पांचवें स्थान के प्रदर्शन को स्वर्ण पदक में बदलना होगा। पुरुष और महिला दोनों टीमों के सामने एशिया में शीर्ष स्थान हासिल करने के साथ-साथ लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक का टिकट हासिल करने का बड़ा लक्ष्य रहेगा।
