करसोग/गोहर (मंडी),वायरल सच (ब्यूरो) : आधी रात को बरसी आफत – हिमाचल प्रदेश में सोमवार की रात एक अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदा ने सबकुछ पल भर में तहस-नहस कर दिया। लोग नींद में थे, लेकिन रात के अंधेरे में उठते ही सैलाब ने सब कुछ बहा लिया। यह त्रासदी केवल एक रात की बात नहीं थी, बल्कि इससे जुड़ी हजारों कहानियां हैं—कहानियां, जो अब दर्द और आंसुओं में लिपटी हुई हैं।
सैलाब का कहर
प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हुई भारी बारिश, बादल फटने, और भूस्खलन ने अपने पीछे असंख्य तबाहियाँ छोड़ी हैं। मंडी जिले में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, जहां 15 स्थानों पर बादल फटे और सैलाब ने लोगों को घर से बाहर निकालने को मजबूर कर दिया। जिला कुल्लू और किन्नौर में भी इस आपदा का असर महसूस हुआ, जहां बादल फटने की घटनाएं हुईं।
मंडी जिले में ब्यास नदी का पानी रिहायशी इलाकों में घुस गया, जिससे वहां के लोग रातोंरात अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर दौड़ते रहे। नतीजा ये हुआ कि 18 लोग अपनी जान गंवा बैठे, जबकि 33 लोग अभी भी लापता हैं। इसके अलावा दर्जनों लोग घायल हुए हैं और सैकड़ों लोग अपनी ज़िंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
मंडी जिले के करसोग इलाके में विशेष रूप से तबाही का मंजर था, जहां पुराना बाजार, पंजराट, कुट्टी, सकरोल, सनारली जैसे स्थानों में पानी और मलबे ने विकराल रूप ले लिया। लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों से बाहर निकलने को मजबूर हुए, लेकिन तेज बहाव ने राहत कार्यों को भी कठिन बना दिया।
करसोग: पुराना बाजार और सकरोल में मलबे का कहर
करसोग क्षेत्र में भी सैलाब ने भारी तबाही मचाई। रात के अंधेरे में लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागे। कार, मोटरसाइकिल, और अन्य सामान पानी में बह गए। लोग इस घटना को अपने जीवन का सबसे भयानक पल मानते हैं। सकरोल निवासी कामेश्वर ने अपनी आंखों देखी दास्तां सुनाते हुए बताया कि रात करीब 11 बजे पानी का बहाव थोड़ा बढ़ा, लेकिन अचानक उसकी रफ्तार इतनी तेज हो गई कि देखते ही देखते उनका ढाबा और कई अन्य चीजें पानी में बह गईं। कामेश्वर के तीन घर भी बह गए, जिससे उनका करीब दो करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
पंगलियुर गांव: ज्यूणी खड्ड का रौद्र रूप
गोहर उपमंडल के स्यांज पंचायत का पंगलियुर गांव रात दो बजे एक अजीब से सन्नाटे में डूब गया। ज्यूणी खड्ड ने रात के अंधेरे में उफान मारा और सब कुछ अपनी चपेट में ले लिया। दो परिवारों के नौ लोग इस उफनते पानी में बह गए। यह हादसा गांव में इस तरह से घटित हुआ कि लोगों को यह विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उनके अपने अब कभी वापस नहीं लौटेंगे।
प्रशासन की देरी और ग्रामीणों का संघर्ष
ग्रामीणों का कहना है कि घटना के बाद प्रशासन ने राहत कार्य शुरू करने में काफी देर की, जिससे कई लोग मलबे में दब गए। स्यांज पंचायत प्रधान मनोज शर्मा ने आरोप लगाया कि घटना के समय प्रशासन को सूचना देने के बावजूद राहत कार्य 12 घंटे बाद शुरू हुआ। इस देरी ने संकट को और बढ़ा दिया।
वहीं, प्रभावितों को 25,000 रुपये की फौरी राहत दी गई, लेकिन यह सिर्फ एक क्षणिक मदद थी। सरकार से अब इन गांवों के लिए स्थायी समाधान की उम्मीद जताई जा रही है।
स्याठी गांव: रेत के ढेर और बिखरे सपने
सिंघी पंचायत के स्याठी गांव में भी प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई। यहां एक दर्जन से अधिक घर, मवेशी और अन्य संपत्ति मलबे में बह गई। धनदेव ने बताया कि इस गांव के लोग कड़ी मेहनत से अपना जीवन बिता रहे थे, लेकिन अब सब कुछ खत्म हो चुका है। दो से तीन करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
शिल्हीबागी में भूस्खलन
सराज क्षेत्र की शिल्हीबागी पंचायत में सोमवार रात भूस्खलन के कारण कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए। तापे राम और उनकी मां भंती देवी मकान के मलबे में दब गए, जिनका अभी तक पता नहीं चल पाया है।
संकट के इस समय में उम्मीद की किरण
इन सभी घटनाओं के बावजूद, स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों का एकजुट प्रयास राहत कार्यों को तेज़ कर रहा है। लोग इस आपदा के बाद एक दूसरे की मदद करने के लिए आगे आए हैं। प्रभावित गांवों में मदद की उम्मीद और कामकाजी समाधान की दिशा में कई प्रयास किए जा रहे हैं।
यह एक ऐसी आपदा थी जिसने न केवल एक ही रात में घरों को बहा दिया, बल्कि जीवन के ठहराव को भी रौंद दिया। लेकिन इस दुख और दर्द के बीच, हिमाचल के लोग अपने आत्मबल और साहस से मुश्किल वक्त का सामना कर रहे हैं।
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