फतेहाबाद, वायरल सच (ब्यूरो) : फतेहाबाद में एक बीमा धोखाधड़ी मामला सामने आया है, जिसमें एक रेहड़ी चालक से बीमा पॉलिसी के नाम पर 20,500 रुपये की ठगी कर ली गई। शुक्रवार को रतिया पुलिस ने इस मामले में साइबर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की है।
घटना का सिलसिला: आइसक्रीम रेहड़ी से शुरुआत
हेमराज ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि वह राजस्थान के भिलवाड़ा के रहने वाले हैं, मगर पिछले कुछ समय से रतिया की टिब्बा कॉलोनी में बस स्टैंड के पास आइसक्रीम की रेहड़ी लगाते हैं।
इस अगस्त 2024 में अचानक उसकी मोबाइल पर एक अज्ञात महिला कॉल आयी, जिसने खुद को “इंडिया फर्स्ट लाइफ इंश्योरेंस” की कर्मचारी बताई। उसने दावा किया कि ‘बैंक ऑफ बड़ौदा’ अनुभवकर्ता की पॉलिसी का भुगतान गलत खाते में गया है, जिससे उसे नुकसान हो रहा है।
महिला ने बताया कि लाभ वापस पाने के लिए उसे शिकायत दर्ज करानी होगी और 12 घंटे में ‘हेड ऑफिस’ से कॉल आएगा, जो बाकी प्रक्रिया बताएगा।
ऑनलाइन झांसे का दूसरा सत्र: खाता खोलना और रकम कट जाना
3-4 घंटे बाद उसी नंबर से कॉल आया। कॉलर ने बताया कि लाभ की राशि पाने के लिए नया बैंक खाता खोलना अनिवार्य है और इसके लिए उसे 20,500 रुपये फीस के रूप में एक “त्रांजेक्शन फीस” जमा करनी होगी।
ठगों ने यह रकम अंजान खाता में ट्रांसफर करने को कहा। हेमराज ने बैंक में चेक लगाया और कुछ देर बाद ही राशि कट गई। मगर 24 घंटे बाद भी लाभ राशि नहीं आई, जिससे धोखाधड़ी का अंदेशा होने लगा।
साइबर पोर्टल में की गई शिकायत
जब वह मदद लेने के लिए संबंधित इंश्योरेंस कंपनी या बैंक से संपर्क नहीं कर पाया, तो उसने साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई।
इस मामले में रतिया पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी के तहत मामला दर्ज कर लिया है, और जांच शुरू कर दी है।
क्या है ऐसे ठगों की चाल?
- आधिकारिक फोन कॉलिंग – इंश्योरेंस या बैंक एजेंट बनकर संपर्क करना।
- डराना-धमकाना – “अपका पॉलिसी का पैसा गलत खाते में गया है” जैसे झूठी जानकारी देकर बातचीत शुरू की जाती है।
- आगरहित माध्यम से राशि जुटाना – “फेसिलिटी फीस” या “रिफंड चार्ज” वगैरह नामों पर धन लालच के चक्कर में निकाल लिया जाता है।
ऐसे बचें साइबर ठगी से:
- पहचान की जांच करें – अधिकारी कहते हैं तो आधिकारिक डाक्यूमेंट या हेल्पलाइन संख्या पर कॉल करें।
- राशि कभी किसी अज्ञात खाते में ट्रांसफर न करें।
- संदेह हो तो सीधा बैंक या इंश्योरेंस कंपनी से संपर्क करें।
- साइबर धोखाधड़ी लगे तो तुरंत NPCR दर्ज करें।
पुलिस की अगली कार्रवाई
- मामले की जाँच – स्थानीय थाने की साइबर सेल ने जांच शुरू की है।
- कॉल डिटेल्स ट्रेस करें – पुलिस कॉल आईडी, ट्रांजेक्शन और फोन लॉग के साथ डेटा ट्रैक करेगी।
- आरोपियों की पहचान – संभवतः इंटर-स्टेट नेटवर्क involved, जिनमें नकल नंबर, SIM कार्ड और बैंक खाते की जाँच करेगी।
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