गुरुग्राम वायरल सच (ब्यूरो): गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड ने हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) के समक्ष दोनों जिलों में समानांतर (पैरेलल) बिजली वितरण लाइसेंस जारी करने के लिए आवेदन किया है। इस याचिका पर आयोग ने सार्वजनिक सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं तथा मामले की सुनवाई 8 जुलाई को निर्धारित की गई है।
कंपनी का कहना है कि उसका उद्देश्य मौजूदा सरकारी बिजली वितरण व्यवस्था को समाप्त करना नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति का एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराना है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत आधुनिक तकनीक आधारित स्मार्ट ग्रिड, डिजिटल बिलिंग, एडवांस मीटरिंग, ऑनलाइन उपभोक्ता सेवाएं और ग्रीन एनर्जी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
कंपनी के अनुसार गुरुग्राम, मानेसर, सोहना और नूंह में तेजी से बढ़ रहे औद्योगिक, व्यावसायिक और शहरी विकास के कारण बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में समानांतर वितरण नेटवर्क उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाली सेवा, तेज शिकायत निवारण और अधिक विश्वसनीय बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने में मददगार साबित हो सकता है।
कंपनी ने दावा किया है कि प्रतिस्पर्धा बढ़ने से बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार होगा, आधुनिक तकनीकों का विस्तार होगा और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिलेंगी। साथ ही स्मार्ट ग्रिड तकनीक के माध्यम से बिजली कटौती में कमी लाने और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
हालांकि, इस प्रस्ताव का बिजली विभाग के कर्मचारी और अभियंता संगठन विरोध कर रहे हैं। हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन और कर्मचारी यूनियनों ने HERC से लाइसेंस आवेदन को खारिज करने की मांग करते हुए 8 जुलाई की सुनवाई में अपना पक्ष रखने की तैयारी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि निजी कंपनी को समानांतर वितरण लाइसेंस देने से सरकारी बिजली निगमों के संचालन और कर्मचारियों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ समरजीत मोहंती ने स्पष्ट किया कि कंपनी सरकारी बिजली निगम की जगह लेने नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य केवल उपभोक्ताओं को एक अतिरिक्त विकल्प देना है। उन्होंने दावा किया कि कई औद्योगिक संगठनों, ग्राम पंचायतों और बड़े कॉर्पोरेट समूहों ने इस पहल का स्वागत किया है।
अब इस पूरे मामले पर सभी की नजरें 8 जुलाई को HERC की सुनवाई पर टिकी हैं। आयोग का फैसला हरियाणा, विशेषकर गुरुग्राम और नूंह की बिजली वितरण व्यवस्था के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।