नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो) : भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से जुड़ी एक बड़ी और निराशाजनक खबर सामने आई है। कंपनी ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह आगामी वित्तीय वर्ष 2026 तक अपने वर्कफोर्स में से 2 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी करेगी। यह आंकड़ा लगभग 12,000 से अधिक कर्मचारियों को प्रभावित करेगा, जो कंपनी के अब तक के सबसे बड़े स्ट्रक्चरिंग फैसलों में से एक माना जा रहा है।
क्यों कर रही है TCS छंटनी?
कंपनी का कहना है कि यह कदम तकनीकी बदलावों, ऑटोमेशन, एआई (AI) और ग्लोबल डिलीवरी मॉडल की पुनः संरचना के तहत उठाया गया है। TCS का उद्देश्य है कि वह आने वाले वर्षों में अधिक फ्लेक्सिबल, भविष्य-तैयार और डिजिटल-केंद्रित टीम के साथ आगे बढ़े।
टीसीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया:
“हम टेक्नोलॉजी की तेज़ी से बदलती दुनिया के साथ अपने संगठन को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना चाहते हैं। इसके लिए जरूरी है कि हम स्किल और जरूरत के बीच सामंजस्य बिठाएं।”
छंटनी का वैश्विक असर, सभी डोमेन होंगे प्रभावित
TCS की यह छंटनी केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगी। कंपनी के अनुसार, यह निर्णय उन सभी देशों और बिजनेस डोमेनों पर लागू होगा जहां टीसीएस कार्यरत है। इसका मतलब है कि अमेरिका, यूरोप, मिडल ईस्ट, एशिया-पैसिफिक समेत वैश्विक टीम पर भी असर पड़ेगा।
वर्तमान में TCS के कर्मचारियों की संख्या लगभग 6.13 लाख है। 2% कटौती का मतलब है कि करीब 12,200 कर्मचारी अपनी नौकरी खो देंगे।
छंटनी के बाद क्या मिलेगा कर्मचारियों को?
कंपनी ने आश्वस्त किया है कि प्रभावित कर्मचारियों को फेयर सेवरैंस पैकेज दिया जाएगा, जिसमें शामिल हैं:
- नोटिस पीरियड के अनुसार सैलरी
- एडेड सेवरैंस बोनस
- हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस बेनिफिट
- आउटप्लेसमेंट सपोर्ट और काउंसलिंग
- वैकल्पिक स्किल डेवलपमेंट के अवसर
इसके बावजूद, मार्केट में इस कदम की आलोचना हो रही है क्योंकि यह IT सेक्टर में बेरोजगारी का नया दौर ला सकता है।
नई बेंच पॉलिसी का दबाव
TCS ने कुछ हफ्ते पहले ही अपनी कर्मचारी बेंच पॉलिसी में बड़े बदलाव किए थे। अब:
- हर कर्मचारी को साल में कम से कम 225 बिल योग्य दिन पूरे करने होंगे
- बेंच टाइम यानी बिना किसी क्लाइंट प्रोजेक्ट पर बैठने की अवधि 35 दिनों से ज्यादा नहीं होनी चाहिए
इसका मतलब है कि यदि कोई कर्मचारी ज्यादा दिनों तक प्रोजेक्ट पर नहीं है, तो उसकी नौकरी खतरे में आ सकती है। यही बदलाव छंटनी की बड़ी वजह माने जा रहे हैं।
अन्य कंपनियों पर असर पड़ने की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि TCS जैसे बड़े एम्प्लॉयर द्वारा उठाए गए इस कदम से अन्य आईटी कंपनियां भी इसी दिशा में जा सकती हैं। खासकर मिड-साइज़ और स्टार्टअप्स, जो पहले से ही फंडिंग की कमी और प्रॉफिट प्रेशर में हैं।
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