दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो) : अमेरिका में भारतीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण बयान दिया, जिसने भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद और कूटनीति पर चल रही चर्चाओं को एक नया मोड़ दिया। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के नाम की अहमियत पर बात की और कहा कि यह एक “शानदार चुना गया नाम” है।
नेशनल प्रेस क्लब, वॉशिंगटन डीसी में हुए संवाद सत्र में थरूर ने विस्तार से समझाया कि ऑपरेशन सिंदूर का नाम क्यों चुना गया और इसका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व क्या है। थरूर ने कहा, “सिंदूर का रंग खून के रंग से बहुत अलग नहीं है।” उन्होंने हिंदी मुहावरे “खून का बदला खून” का हवाला देते हुए इसे ‘सिंदूर का बदला खून’ के रूप में समझाया। इसका अर्थ यह था कि आतंकवादियों द्वारा सिंदूर के साथ किए गए क्रूर व्यवहार का जवाब खून के रूप में दिया गया है।
ऑपरेशन सिंदूर: क्या है इसका महत्व?
आपको याद दिला दें कि ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सरकार ने आतंकवादियों द्वारा किए गए वीभत्स कृत्यों के खिलाफ एक कड़ा संदेश देने के रूप में शुरू किया। शशि थरूर ने इस ऑपरेशन को उस अत्याचार का जवाब बताया, जिसमें आतंकवादियों ने भारतीय महिलाओं के माथे से सिंदूर को मिटा दिया। थरूर के अनुसार, यह घटना सिर्फ एक सांस्कृतिक अपमान नहीं थी, बल्कि यह भारतीय समाज के एक महत्वपूर्ण प्रतीक को नष्ट करने का कृत्य था।
थरूर ने कहा, “सिंदूर, हिंदू परंपरा में विवाहित महिलाओं के माथे पर लगाया जाने वाला एक प्रतीक है। यह न सिर्फ एक धार्मिक संकेत है, बल्कि यह महिलाओं की पहचान और उनकी स्थायी स्थिति का प्रतीक भी है।” उन्होंने यह भी बताया कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य सिर्फ आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि उस अपमान का बदला भी लेना है जो भारतीय संस्कृति और महिलाओं के सम्मान को लेकर किया गया था।
आतंकवादियों के खतरनाक कृत्य
थरूर ने आतंकवादियों द्वारा किए गए कुछ कृत्यों की भयावहता को साझा किया, जिसमें खासकर उन महिलाओं के साथ हुए अत्याचारों को बताया जिन्होंने अपने पति और बच्चों के सामने मौत को देखा, लेकिन उन्हें स्वयं नहीं मारा गया। थरूर ने कहा, “जब एक पत्नी ने कहा कि मुझे भी मार दो, तो आतंकवादियों ने उसे यह कहकर छोड़ दिया कि ‘तुम वापस जाओ और उन्हें बताओ कि हमने क्या किया है।'”
इस सत्र में थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि इस ऑपरेशन का मकसद सिर्फ एक प्रतिशोध नहीं है, बल्कि यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ उसकी दृढ़ता को भी प्रदर्शित करना है। “हम उन 26 भारतीय महिलाओं के माथे से मिटाए गए सिंदूर का बदला लेना चाहते हैं, जिनके साथ आतंकवादियों ने बर्बरता की,” उन्होंने कहा।
ऑपरेशन सिंदूर और उसकी सांस्कृतिक गहराई
थरूर ने सिंदूर के रंग के महत्व को समझाते हुए कहा, “सिंदूर का रंग चमकीला सिंदूरी लाल है, जो खून के रंग से बहुत ही समान है। यह न केवल एक धार्मिक प्रतीक है, बल्कि यह हमारे समाज की शक्ति और शौर्य का भी प्रतीक है। जब आतंकवादियों ने इस सिंदूर को मिटाया, तो वे भारतीय समाज की उस शक्ति और शौर्य का अपमान कर रहे थे जो महिलाओं में निहित है।”
भारत में सिंदूर, विवाहित महिलाओं के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रतीक है, जो उनकी शादीशुदा जिंदगी और परिवारिक जिम्मेदारियों का प्रतीक है। इसके अलावा, यह भारतीय संस्कृति की एक अमिट पहचान भी है। ऐसे में आतंकवादियों द्वारा इसे नष्ट करना न केवल भारतीय महिलाओं के लिए एक आघात था, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक गहरी चोट थी।
नतीजा और संदेश
शशि थरूर ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य क़दम नहीं है, बल्कि यह भारत के समाज की ताकत, उसकी सांस्कृतिक धरोहर और आतंकवाद के खिलाफ उसकी अविचल दृढ़ता का भी प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि इस ऑपरेशन के तहत भारत एक महत्वपूर्ण संदेश दे रहा है, जो यह दर्शाता है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में किसी भी सीमा तक जा सकता है।
यह बयान अमेरिकी मीडिया और कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर गया है, क्योंकि यह एक सांस्कृतिक संदर्भ में आतंकवाद के खिलाफ भारतीय प्रतिक्रिया को जोड़ता है। “सिंदूर का बदला खून” का यह वाक्य न केवल एक रणनीतिक जवाब है, बल्कि यह भारतीय समाज की गहरी सांस्कृतिक धरोहर और एकजुटता को भी दिखाता है।
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