मॉस्को, वायरल सच (ब्यूरो): Russia में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार हुए संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की समर्थक यूनाइटेड Russia पार्टी ने बड़ी बढ़त हासिल की है। शुरुआती आधिकारिक नतीजों में पार्टी को करीब 58 फीसदी वोट मिले हैं और वह 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा में दो-तिहाई बहुमत बनाए रखने की स्थिति में है।
यूक्रेन युद्ध के बाद Russia में पहला संसदीय चुनाव
Russia में 18 से 20 सितंबर तक तीन दिन मतदान हुआ। यह फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद पहला संसदीय चुनाव था। इस चुनाव को क्रेमलिन के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि राष्ट्रपति पुतिन ने मतदान को युद्ध और उनकी नीतियों के प्रति समर्थन के संकेत के रूप में पेश किया था।
चुनाव में स्टेट ड्यूमा की सभी 450 सीटों के लिए मतदान हुआ। इनमें 225 सीटें पार्टी-लिस्ट प्रणाली और 225 सीटें सिंगल-मेंबर निर्वाचन क्षेत्रों के जरिए तय होती हैं।
यूनाइटेड रशिया को मिला बहुमत
शुरुआती परिणामों के अनुसार यूनाइटेड रशिया करीब 58 फीसदी पार्टी-लिस्ट वोट के साथ सबसे आगे है। कम्युनिस्ट पार्टी और एलडीपीआर इसके बाद हैं। पार्टी 2021 में हासिल किए गए अपने दो-तिहाई बहुमत को बनाए रखने की स्थिति में है।
पुतिन के लिए दो-तिहाई बहुमत क्यों जरूरी?
स्टेट ड्यूमा में दो-तिहाई बहुमत पुतिन सरकार के लिए खास महत्व रखता है। Russia के संविधान में संशोधन के लिए ड्यूमा में कम से कम दो-तिहाई समर्थन जरूरी होता है। Reuters के अनुसार, यूनाइटेड Russia को इस सुपरमेजॉरिटी को बनाए रखने के लिए कम से कम 300 सीटों की जरूरत है।
इस बहुमत से क्रेमलिन को संवैधानिक बदलावों और प्रमुख विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में अन्य दलों पर निर्भरता कम रहती है।
विपक्ष को लेकर भी उठे सवाल
इस चुनाव में वास्तविक विपक्ष की मौजूदगी को लेकर सवाल उठे हैं। रूस की उदारवादी और युद्ध-विरोधी पार्टी याब्लोको को पार्टी-लिस्ट चुनाव से बाहर कर दिया गया था। वहीं अन्य प्रमुख दलों को भी कई प्रमुख मुद्दों पर क्रेमलिन की नीतियों के साथ मतदान करने वाला माना जाता है।
Russia के अधिकारियों ने चुनाव प्रक्रिया पर उठाई गई आलोचनाओं को खारिज किया है, जबकि विपक्षी समूहों और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग आपत्तियां दर्ज की हैं।
चुनाव के बीच ड्रोन हमले और साइबर अटैक
मतदान के अंतिम दिन यूक्रेन की ओर से मॉस्को समेत रूस के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर ड्रोन हमलों की खबरें सामने आईं। रूसी अधिकारियों ने चुनावी प्रणालियों पर साइबर हमलों की भी जानकारी दी।
इन परिस्थितियों के बीच चुनाव परिणामों को क्रेमलिन की ओर से राजनीतिक समर्थन के संकेत के तौर पर पेश किए जाने की संभावना है, हालांकि चुनाव की राजनीतिक परिस्थितियों और विपक्ष की सीमित भागीदारी को देखते हुए परिणामों की व्याख्या को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग दृष्टिकोण हैं।
