नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो): भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को देश की मौद्रिक नीति को लेकर बड़ा फैसला लिया है। RBI ने Repo Rate में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है। यह करीब चार साल में पहली बार है जब केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दर में बढ़ोतरी की है। RBI का फैसला ऐसे समय आया है जब महंगाई के दबाव और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों को लेकर चिंता बढ़ी हुई है।
क्यों बढ़ाई गई ब्याज दर?
RBI के अनुसार महंगाई का दबाव फिर से बढ़ रहा है। अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82 प्रतिशत रही, जो केंद्रीय बैंक के 4 प्रतिशत के मध्यम अवधि लक्ष्य से ऊपर है। बढ़ती ऊर्जा और खाद्य कीमतों के साथ वैश्विक परिस्थितियों ने भी महंगाई के जोखिम को बढ़ाया है।
RBI ने अपनी नीति का रुख ‘neutral’ से बदलकर ‘calibrated tightening’ कर दिया है। इसका संकेत यह है कि केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों में भी महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना सकता है। हालांकि RBI गवर्नर ने संकेत दिया है कि आगे के फैसले वास्तविक महंगाई और आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों पर निर्भर करेंगे।
आम लोगों की EMI पर क्या असर?
Repo Rate वह दर है जिस पर RBI बैंकों को अल्प अवधि के लिए पैसा उपलब्ध कराता है। जब Repo Rate बढ़ती है तो बैंकों के लिए फंडिंग लागत बढ़ सकती है। इसका असर floating-rate home loan, car loan और personal loan की ब्याज दरों पर पड़ सकता है।
ऐसे कर्ज लेने वाले लोगों की EMI बढ़ने या लोन की अवधि बढ़ने की संभावना रहती है। हालांकि वास्तविक असर हर बैंक की lending rate और ग्राहक के loan agreement पर निर्भर करेगा। वहीं दूसरी तरफ FD और अन्य जमा योजनाओं की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना से बचत करने वालों को कुछ राहत मिल सकती है।
GDP Growth का अनुमान भी बढ़ा
RBI ने चालू वित्त वर्ष के लिए GDP growth का अनुमान 7.1 प्रतिशत कर दिया है। जून तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही थी। यानी केंद्रीय बैंक एक तरफ महंगाई को लेकर सतर्क है, तो दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था की मजबूत growth को भी ध्यान में रख रहा है।
