भारत का रक्षा बजट और R&D खर्च 2047 तक होगा दोगुना, तीसरा सबसे बड़ा देश बनेगा

नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो) : पठानकोट में हाल ही में हुई घटनाओं और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के साथ हवाई मुठभेड़ के बाद भारत ने अपने रक्षा बजट में काफ़ी बड़ा बदलाव करने का नीतिगत निर्णय लिया है। अगले वित्त वर्ष से देश रक्षा बजट में लगभग ₹60,000 करोड़ की वृद्धि करने जा रहा है। साथ ही, अनुसंधान और विकास (R&D) के लिए आवंटन अब 5.1% से बढ़ाकर 10% कर दिया जाएगा।

क्या बदलेगा?

  • बजट में बड़ा इजाफा:
    आगामी वित्त वर्ष का रक्षा बजट पहले के लगभग ₹6.8 लाख करोड़ की तुलना में बढ़कर ₹7.4 लाख करोड़ तक पहुंच सकेगा।
  • R&D पर खर्च में दोगुनी वृद्धि:
    पहले जहां कुल बजट का सिर्फ 5.1% आरएंडडी के लिए था, अब यह 10% तक हो जाएगा, जिससे महत्त्वपूर्ण रक्षा परियोजनाएँ तेज होंगी।
  • 2047 तक आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य:
    भारतीय उद्योग परिसंघ और KPMG की भविष्यवाणी है कि 2047 तक रक्षा बजट ₹31.7 लाख करोड़ तक जा सकता है, और तब भारत विश्व में तीसरे स्थान पर होगा।

विस्तृत अनुमान और आर्थिक दिशा

  • रक्षा उत्पादन साल 2024–25 में ₹1.6 लाख करोड़ से बढ़कर 2047 तक ₹8.8 लाख करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है।
  • रक्षा निर्यात ₹30,000 करोड़ से बढ़कर ₹2.8 लाख करोड़ तक होगा — जिससे भारत अब वैश्विक रक्षा बाजार में मजबूत खिलाड़ी बन सकता है।
  • कुल पूंजीगत खर्च (Infrastructure + Equipment) की हिस्सेदारी 27% से बढ़कर 2047 तक 40% तक आ सकती है।
  • रक्षा खर्च अब GDP का 2% से बढ़कर 4–5% होने की संभावनाएं देखी जा रही हैं, जो दुनिया में कई विकसित देशों की तुलना में अधिक है।

चुनौतियाँ और सुधार के सुझाव

  • औद्योगिक आत्मनिर्भरता: कुछ अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों में भारत अभी भी आयात पर निर्भर है, जिसे घरेलू उत्पादन से बदलना फिलहाल प्राथमिकता नहीं है।
  • कुशल मानव संसाधन: R&D और जटिल सिस्टम्स चलाने के लिए विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है, जिसे उभरते इंजीनियरों और वैज्ञानिकों के प्रशिक्षण से पूरा किया जा सकता है।
  • नीति और व्यावसायिक माहौल: निजी क्षेत्र को रक्षा निर्माण में लाने के लिए साफ‑सुथरी नीति, टैक्स प्रोत्साहन, और आधुनिक बौद्धिक संपदा कानून जरूरी हैं।
  • वैश्विक भागीदारी: विदेशी साझेदारी से प्रौद्योगिकी ट्रांसफर और स्थानीय स्पष्टीकरण से उत्पादन में सुधार आ सकता है — लेकिन इसमें भी बौद्धिक संपदा अधिकारों का प्रबंधन चुनौतीपूर्ण रहेगा।

भविष्य की दिशा

  • वित्तीय निवेश: रक्षा क्षेत्र की ताकत तीन गुना बढ़ेगी
  • R&D में भारी निवेश: नई प्रणालियाँ जल्द तैयार होंगी
  • आत्मनिर्भरता की रफ्तार: विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी
  • ग्लोबल क्षमताएँ: निर्यात बढ़ने से विदेशी बाजार खुलेंगे
  • स्किल डेवलपमेंट: युवा इंजीनियरों एवं वैज्ञानिकों को ट्रेनिंग दी जाएगी

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