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PM मोदी बोले- भारत ने दुनिया को दी सस्ती दवाएं, कभी रॉयल्टी नहीं मांगी

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नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो): PM नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित Bloomberg New Economy Forum को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने दुनिया को सस्ती दवाएं, प्रतिभाशाली युवा, तकनीकी समाधान और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। भारत ने अपने योगदान के बदले न तो हमेशा क्रेडिट की अपेक्षा की और न ही हर उपलब्धि के लिए रॉयल्टी मांगी। PM ने कहा कि भारत की विकास यात्रा का उद्देश्य केवल अपनी आर्थिक ताकत बढ़ाना नहीं, बल्कि दुनिया के दूसरे देशों को भी आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है।

Bloomberg New Economy Forum का आठवां संस्करण 13 से 15 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। भारत पहली बार इस वैश्विक मंच की मेजबानी कर रहा है। इस वर्ष की थीम बदलती दुनिया में शक्ति के नए स्रोतों को परिभाषित करने पर केंद्रित है। फोरम में सरकारों, उद्योगों, वित्तीय संस्थानों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़ी वैश्विक हस्तियों के शामिल होने की योजना है। यहां वैश्विक अर्थव्यवस्था, निवेश, ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बदलते अंतरराष्ट्रीय आर्थिक समीकरणों पर चर्चा हो रही है।

सस्ती दवाओं और भारतीय प्रतिभा का वैश्विक योगदान

PM मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि जब दुनिया को सस्ती और सुलभ दवाओं की आवश्यकता होती है, तब भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी तरह, जब वैश्विक उद्योगों और संस्थानों को कुशल प्रतिभाओं की जरूरत होती है, तब भारतीय युवाओं पर भरोसा किया जाता है। उन्होंने भारत को वैश्विक व्यवस्था में एक भरोसेमंद भागीदार बताते हुए कहा कि जरूरत के समय देश अपनी जिम्मेदारी समझकर सहयोग के लिए आगे आता है।

PM ने शून्य की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया गर्व के साथ स्वीकार करती है कि भारत ने शून्य का ज्ञान दिया, लेकिन भारत ने इसके लिए रॉयल्टी नहीं मांगी। उनके संबोधन का मुख्य संदेश यह था कि ज्ञान, तकनीक और नवाचार का महत्व केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं होना चाहिए। इनका इस्तेमाल मानवता की समस्याओं के समाधान और व्यापक सामाजिक विकास के लिए भी किया जाना चाहिए।

भारत लंबे समय से वैश्विक दवा आपूर्ति व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। भारतीय दवा उद्योग जेनेरिक दवाओं के उत्पादन और निर्यात के लिए जाना जाता है। किफायती दवाओं की उपलब्धता ने अनेक देशों की स्वास्थ्य सेवाओं को सहयोग दिया है। हालांकि, दवाओं की कीमत, गुणवत्ता, पेटेंट और बौद्धिक संपदा से जुड़े मुद्दे वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था में लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में भरोसे को बताया सबसे बड़ी जरूरत

PM मोदी ने कहा कि दुनिया लगातार बदलते संकटों का सामना कर रही है। एक समस्या से निकलने की कोशिश के बीच दूसरी चुनौती सामने आ जाती है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, भुगतान प्रणाली और तकनीक जैसे क्षेत्र अब आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ रणनीतिक प्रभाव के साधन भी बनते जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में दुनिया को ऐसे साझेदारों की जरूरत है, जिन पर संकट के समय भरोसा किया जा सके। देशों को यह विश्वास होना चाहिए कि जरूरत पड़ने पर आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति जारी रहेगी, किए गए वादे पूरे होंगे और कठिन परिस्थितियों में सहयोगी देश साथ खड़े रहेंगे।

भारत इसी सोच के साथ वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में अपनी भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा है। PM के अनुसार, किसी देश की वास्तविक क्षमता केवल उसके संसाधनों या आर्थिक आकार से नहीं मापी जानी चाहिए। यह भी महत्वपूर्ण है कि वह अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल दूसरों की सहायता और साझा समस्याओं के समाधान के लिए किस तरह करता है।

वैश्विक व्यापार और निवेश के मौजूदा परिदृश्य में यह मुद्दा महत्वपूर्ण है। कंपनियां उत्पादन और आपूर्ति के लिए अलग-अलग देशों पर निर्भर हैं। ऐसे में व्यापारिक स्थिरता, नीतिगत भरोसा और तकनीकी सहयोग निवेश के फैसलों को प्रभावित करते हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बदल रहा काम करने का तरीका

PM ने Artificial Intelligence (AI) को वैश्विक बदलाव का एक महत्वपूर्ण कारक बताया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विभिन्न क्षेत्रों में काम करने के तरीकों को बदल रहा है। इसका असर उद्योग, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, प्रशासन, वित्तीय सेवाओं और कारोबार पर दिखाई दे रहा है।

भारत में डिजिटल तकनीक के विस्तार का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीकी विकास का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचना चाहिए। उनके अनुसार, तकनीक की सफलता केवल नए उपकरण या अधिक तेज सेवाएं विकसित करने में नहीं, बल्कि लोगों की वास्तविक समस्याओं को हल करने में है।

PM ने कहा कि प्रतिस्पर्धा आवश्यक है, लेकिन उसके साथ मानवीय संवेदना और सहयोग भी जरूरी है। राष्ट्रीय शक्ति का उपयोग केवल अपने हितों तक सीमित रखने के बजाय वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भी किया जाना चाहिए।

AI के बढ़ते प्रभाव के साथ डेटा सुरक्षा, रोजगार में बदलाव, तकनीकी संसाधनों तक पहुंच और जिम्मेदार इस्तेमाल जैसे विषय भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। भारत के सामने चुनौती यह है कि तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करने के साथ उसके लाभ छोटे कारोबारियों, युवाओं और आम नागरिकों तक पहुंचाए जाएं।

कोविड के दौरान 100 से अधिक देशों तक पहुंचाई वैक्सीन

PM मोदी ने कोरोना महामारी का उल्लेख करते हुए कहा कि संकट के समय वैक्सीन निर्माण और उसकी उपलब्धता का विशेष महत्व था। भारत ने 100 से अधिक देशों को कोविड-19 वैक्सीन की आपूर्ति की। उन्होंने इसे भारत की वैश्विक जिम्मेदारी और सहयोग की भावना से जोड़कर प्रस्तुत किया।

भारत ने महामारी के दौरान घरेलू टीकाकरण अभियान के साथ दूसरे देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराई थी। इस अवधि में वैक्सीन उत्पादन, आपूर्ति और स्वास्थ्य संसाधनों की उपलब्धता अंतरराष्ट्रीय चर्चा के प्रमुख विषय रहे।

PM ने डिजिटल प्रशासन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तकनीक के उपयोग से सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की गई है। इससे सरकार और नागरिकों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने में मदद मिली।

उन्होंने भारत के CoWIN प्लेटफॉर्म का भी जिक्र किया, जिसका इस्तेमाल कोविड टीकाकरण के पंजीकरण और प्रमाणपत्र संबंधी सेवाओं के लिए किया गया। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बड़े स्तर पर सेवाओं का प्रबंधन करना भारत के प्रशासनिक और तकनीकी अनुभव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

PM ने कहा कि भारत अपनी तकनीकी क्षमताओं को केवल देश के भीतर तक सीमित रखने के बजाय दूसरे साझेदार देशों के साथ साझा करने के पक्ष में है। इससे अन्य देश अपनी जरूरतों के अनुसार तकनीकी व्यवस्थाएं विकसित कर सकते हैं।

ऊर्जा परिवर्तन में भारत की भूमिका

PM ने ऊर्जा परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े लक्ष्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं के तहत निर्धारित एक महत्वपूर्ण लक्ष्य समय से पहले हासिल किया। उन्होंने इसे केवल एक औपचारिक लक्ष्य पूरा करने के बजाय देश की व्यापक विकास यात्रा का हिस्सा बताया।

भारत के ऊर्जा क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ऊर्जा दक्षता पर काम किया जा रहा है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा का महत्व बढ़ने के बीच देशों के सामने यह चुनौती है कि वे आर्थिक विकास की जरूरतों को पूरा करते हुए ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाएं।

PM के संबोधन में ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों का उल्लेख इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि आधुनिक उद्योग और नई तकनीकें इन संसाधनों पर काफी हद तक निर्भर हैं। ऊर्जा की उपलब्धता, लागत और आपूर्ति में स्थिरता का प्रभाव विनिर्माण, परिवहन और निवेश पर पड़ता है।

भारत के लिए ऊर्जा परिवर्तन का अर्थ केवल स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि बढ़ती मांग के अनुरूप भरोसेमंद और किफायती ऊर्जा उपलब्ध कराना भी है।

एक दशक में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने का दावा

PM मोदी ने भारत में गरीबी उन्मूलन और आर्थिक अवसरों के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया। उन्होंने इसे शासन व्यवस्था में नागरिकों को सशक्त बनाने की सोच से जोड़ा।

PM के अनुसार, सरकार के पास अधिकार और संसाधन होते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य नागरिकों को हमेशा सरकारी सहायता पर निर्भर बनाए रखना नहीं होना चाहिए। इसके बजाय ऐसी व्यवस्थाएं विकसित की जानी चाहिए, जिनसे लोग अपने पैरों पर खड़े हो सकें और आर्थिक अवसरों का लाभ उठा सकें।

गरीबी में कमी, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और आय के अवसर भारत की विकास संबंधी बहस के प्रमुख विषय हैं। गरीबी से बाहर निकलने के आंकड़ों को समझने में इस्तेमाल की गई परिभाषा और मापदंड भी महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए अलग-अलग आकलनों में गरीबी के स्तर और उसमें आए बदलाव को समझने के लिए उनके आधार पर ध्यान देना आवश्यक है।

PM ने अपने संबोधन में समावेशी विकास को महत्व देते हुए कहा कि आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के अधिक से अधिक वर्गों तक पहुंचना चाहिए।

स्टार्टअप और छोटे शहरों में बढ़ते अवसर

PM ने भारत की स्टार्टअप यात्रा को आर्थिक बदलाव का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि देश में नवाचार के अवसर पहले की तुलना में अधिक लोगों तक पहुंचे हैं और छोटे शहरों से भी नई प्रतिभाएं सामने आ रही हैं।

भारत में स्टार्टअप क्षेत्र ने तकनीक, वित्तीय सेवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल कारोबार जैसे कई क्षेत्रों में नए उद्यमों को बढ़ावा दिया है। छोटे शहरों के उद्यमियों के लिए डिजिटल कनेक्टिविटी, ऑनलाइन भुगतान और इंटरनेट आधारित सेवाओं ने बाजार तक पहुंचने के नए रास्ते खोले हैं।

PM ने मोबाइल कनेक्टिविटी के विस्तार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सस्ती मोबाइल सेवाओं और डिजिटल पहुंच से छोटे दुकानदारों तथा आम नागरिकों को नए अवसर मिले हैं। कनेक्टिविटी का अर्थ अब केवल लोगों को जोड़ना नहीं, बल्कि उन्हें कारोबार, जानकारी और सेवाओं से जोड़ना भी है।

हालांकि, स्टार्टअप क्षेत्र की दीर्घकालिक सफलता के लिए निवेश की उपलब्धता, कारोबार को बढ़ाने की क्षमता, कुशल कर्मचारियों और स्थायी आय के अवसरों का महत्व बना हुआ है। छोटे शहरों में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता और डिजिटल बुनियादी ढांचे की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

वैश्विक मंच पर भारत की मेजबानी

Bloomberg New Economy Forum की स्थापना 2018 में हुई थी। यह मंच विभिन्न देशों के राजनीतिक नेतृत्व, उद्योग जगत, निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श का अवसर देता है।

2026 का संस्करण 13 से 15 अक्टूबर तक नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। ब्लूमबर्ग की घोषित वक्ता सूची के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ब्लूमबर्ग के संस्थापक माइकल ब्लूमबर्ग, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, इटली के पूर्व प्रधानमंत्री मारियो द्रागी, अमेरिका की पूर्व वाणिज्य मंत्री जीना रायमोंडो, सिस्को के सीईओ चक रॉबिंस और ब्लैकस्टोन के अध्यक्ष जोनाथन ग्रे जैसी हस्तियों के शामिल होने की घोषणा की गई है।

फोरम में 500 से अधिक वैश्विक नेताओं और कारोबार जगत की प्रमुख हस्तियों को एक साथ लाने की योजना है। चर्चा के प्रमुख विषयों में निवेश, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैश्विक आर्थिक सहयोग शामिल हैं।

भारत में पहली बार इस आयोजन की मेजबानी होना देश के कारोबारी और तकनीकी वातावरण को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर है। इस तरह के आयोजनों में होने वाली चर्चाएं निवेशकों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के बीच संवाद को आगे बढ़ा सकती हैं।

भारत ने वैश्विक सहयोग और साझा विकास पर दिया जोर

PM मोदी के संबोधन का केंद्रीय संदेश यह रहा कि आर्थिक शक्ति का उद्देश्य केवल संसाधनों और प्रभाव का विस्तार करना नहीं, बल्कि दूसरों को सक्षम बनाना भी है। उन्होंने सस्ती दवाओं, भारतीय प्रतिभा, डिजिटल प्रशासन, कोविड वैक्सीन आपूर्ति और ऊर्जा परिवर्तन के उदाहरणों के माध्यम से भारत की वैश्विक भूमिका को रेखांकित किया।

PM ने कहा कि भारत अपनी क्षमताओं को ग्लोबल साउथ और दूसरे साझेदार देशों के साथ साझा करना चाहता है, ताकि वे अपनी जरूरतों के अनुसार उनका इस्तेमाल कर सकें। उन्होंने तकनीक, नवाचार और सहयोग को भविष्य की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण आधारों के रूप में प्रस्तुत किया।

नई दिल्ली में आयोजित Bloomberg New Economy Forum में वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियों और भविष्य के अवसरों पर चर्चा हो रही है। भारत की पहली मेजबानी के बीच प्रधानमंत्री का संदेश किफायती स्वास्थ्य सेवाओं, प्रतिभा, तकनीकी सहयोग और साझा समृद्धि पर केंद्रित रहा।

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