गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो): Manesar नगर निगम क्षेत्र में सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अगले छह महीने में 7.60 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पांच साल के बड़े टेंडर को मंजूरी मिलने तक नगर निगम ने अंतरिम व्यवस्था के तहत छोटे टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली है। मौजूदा एजेंसी को 3 नवंबर 2026 तक काम करना है, जिसके बाद नई एजेंसी सफाई की जिम्मेदारी संभालेगी।
Manesar नगर निगम की स्वच्छ भारत मिशन (SBM) शाखा ने अंतरिम टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसका उद्देश्य बड़े टेंडर की स्वीकृति मिलने तक शहर की सड़कों और सार्वजनिक क्षेत्रों में सफाई कार्य जारी रखना है। हालांकि, मानेसर में लंबे समय से सफाई व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में नई एजेंसी के सामने सफाई व्यवस्था में सुधार करना बड़ी चुनौती होगी।
पांच साल के रोड स्वीपिंग टेंडर की कीमत करीब ₹107 करोड़
Manesar नगर निगम ने पांच साल के लिए रोड स्वीपिंग का करीब 107 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया था। इस टेंडर को मंजूरी के लिए मुख्यालय भेजा गया है। स्वीकृति मिलने तक नगर निगम अंतरिम टेंडर के माध्यम से सफाई कार्य जारी रखेगा।
अंतरिम व्यवस्था के तहत छह महीने में 7.60 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। नगर निगम की योजना के अनुसार, नई एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद सफाई कार्य में निरंतरता बनाए रखी जाएगी। बड़े टेंडर को मंजूरी मिलने के बाद आगे की व्यवस्था उसी के अनुसार संचालित की जाएगी।
मौजूदा एजेंसी को कम कर्मचारियों के मामले में नोटिस
फिलहाल Manesar नगर निगम क्षेत्र में पेस्टटेक सोलुशन एजेंसी सफाई का काम कर रही है। एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार शिकायतें सामने आने के बाद नगर निगम ने उसे कम मैनपावर लगाने के मामले में नोटिस जारी किया है।
इसके अलावा कर्मचारियों के हितों की अनदेखी किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। क्षेत्र में सफाई व्यवस्था की स्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष बना हुआ है। जगह-जगह कूड़े के ढेर दिखाई देने और नियमित सफाई नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
Manesar नगर निगम के सामने चुनौती केवल नई एजेंसी को काम सौंपने तक सीमित नहीं है, बल्कि सफाई कर्मचारियों की पर्याप्त तैनाती, नियमित निगरानी और शिकायतों का समय पर समाधान सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
सड़कों पर धूल और कूड़ा जलाने की घटनाओं से प्रदूषण की चिंता
Manesar में कूड़ा जलाने की घटनाओं और सड़कों के किनारे जमा धूल को लेकर भी चिंता बनी हुई है। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) लागू होने के बावजूद सड़कों के किनारे धूल फैली रहने की शिकायतें हैं। इससे क्षेत्र में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रयासों पर सवाल उठ रहे हैं।
सड़कों की नियमित सफाई, धूल को नियंत्रित करने के प्रभावी उपाय और कचरे का उचित निस्तारण प्रदूषण नियंत्रण के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। कूड़ा जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी और नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
Manesar जैसे तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक और आवासीय क्षेत्र में सफाई व्यवस्था और प्रदूषण नियंत्रण एक-दूसरे से जुड़े हुए मुद्दे हैं। यदि सड़कों की सफाई नियमित रूप से नहीं होती और कचरे का समय पर उठान नहीं किया जाता, तो इससे स्थानीय निवासियों और कामकाजी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
सेक्टर-2 में प्रदूषण मापक मशीन, फिर भी सफाई पर सवाल
Manesar के सेक्टर-2 में प्रदूषण मापक मशीन लगाई गई है। इसके बावजूद आसपास के क्षेत्र में सफाई व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। मानेसर में प्रदूषण का मुद्दा चर्चा में रहने के कारण नगर निगम की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
ऐसे में केवल टेंडर जारी करना पर्याप्त नहीं होगा। सफाई कार्य की गुणवत्ता की नियमित जांच, निर्धारित संख्या में कर्मचारियों की तैनाती, सड़कों से धूल हटाने और कूड़े का समय पर उठान सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा।
नई एजेंसी के सामने सफाई व्यवस्था सुधारने की चुनौती
Manesar नगर निगम के एक्सईएन, स्वच्छ भारत मिशन, निजेश कुमार ने बताया कि नई एजेंसी को काम सौंप दिया गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई व्यवस्था के तहत सफाई कार्य कितनी प्रभावी तरीके से संचालित होता है।
अंतरिम टेंडर पर छह महीने में 7.60 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना ऐसे समय में सामने आई है, जब मानेसर में सफाई और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर शिकायतें बनी हुई हैं। नई एजेंसी से नियमित सफाई, कचरे के समय पर उठान और सड़कों पर धूल कम करने के लिए प्रभावी काम की अपेक्षा रहेगी।
Manesar नगर निगम के लिए यह अंतरिम व्यवस्था बड़े टेंडर की मंजूरी तक सफाई कार्य जारी रखने का माध्यम है। इसका वास्तविक लाभ तभी दिखाई देगा, जब क्षेत्र में कूड़े के ढेर कम हों, सड़कें साफ रहें और सफाई व्यवस्था में लगातार सुधार हो।
