कजान, वायरल सच (ब्यूरो): रूस के तातारस्तान प्रांत में पहला Ayurveda Center स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। इस परियोजना का निर्माण कार्य 2028 तक पूरा होने की संभावना है। दूसरे कजान भारत-रूस बिजनेस फोरम में तातारस्तान के जेलेनोडोल्स्क जिले में केंद्र स्थापित करने के लिए आधिकारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल से भारत और रूस के बीच स्वास्थ्य सेवाओं तथा पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
प्रस्तावित Ayurveda Center का उद्देश्य रूसी क्षेत्र में भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की मांग का आकलन करना और स्थानीय लोगों के बीच इन सेवाओं की स्वीकार्यता को समझना है। परियोजना में भारतीय स्वास्थ्य एवं वेलनेस ब्रांड भी सहयोग करेंगे। इसके माध्यम से भविष्य में आयुर्वेदिक सेवाओं के विस्तार की संभावनाओं का पता लगाया जाएगा।
तातारस्तान में आयुर्वेद की बढ़ती संभावनाएं
तातारस्तान इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट एजेंसी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी तालिया मिनुल्लिना ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि क्षेत्र में आयुर्वेद का प्रचलन बढ़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए बिजनेस फोरम में आयुर्वेदिक केंद्र स्थापित करने पर सहमति बनी है।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित Ayurveda Center के माध्यम से यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि रूस के इस क्षेत्र में भारतीय पारंपरिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक सेवाओं को कितनी स्वीकार्यता मिलती है। इसके परिणाम भविष्य में इस क्षेत्र में निवेश और सेवाओं के विस्तार की संभावनाओं को समझने में सहायक हो सकते हैं।
इस पहल को भारत और रूस के बीच अस्थायी रोजगार से संबंधित नए द्विपक्षीय ढांचे से भी समर्थन मिलने की उम्मीद है। इसके तहत निर्धारित पात्रता और प्रशिक्षण की शर्तें पूरी करने वाले प्रमाणित आयुर्वेद चिकित्सकों तथा थेरेपिस्ट के लिए रूस में काम करने के अवसर आसान हो सकते हैं।
भारतीय मेडिकल छात्रों की मौजूदगी
तातारस्तान में एक हजार से अधिक भारतीय विद्यार्थी मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। कजान शहर भारतीय विद्यार्थियों के लिए चिकित्सा शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां की फीस भारत के कई निजी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में कम होने के कारण हर साल बड़ी संख्या में भारतीय विद्यार्थी प्रवेश लेते हैं।
प्रस्तावित Ayurveda Center भारत और रूस के बीच चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा पारंपरिक उपचार पद्धतियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में उपयोगी साबित हो सकता है। हालांकि, केंद्र में उपलब्ध होने वाली सेवाओं और इसके संचालन से जुड़ी विस्तृत जानकारी परियोजना के आगे बढ़ने के साथ स्पष्ट होगी।
कजान में एमबीबीएस की फीस में बढ़ोतरी
रूस में भारतीय विद्यार्थियों के प्रवेश से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, कजान में एमबीबीएस की फीस में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बढ़ोतरी हुई है। लखनऊ के रहने वाले और अब रूस के नागरिक डॉ. अशुतोष द्विवेदी, जो प्रोलोंग एज्युकेशन कंसल्टेंट्स के निदेशक हैं, ने बताया कि उनके अनुसार हर साल लगभग 150 से 170 भारतीय विद्यार्थी यहां प्रवेश लेते हैं।
उन्होंने बताया कि कजान में एमबीबीएस की सालाना फीस पहले करीब 4.16 लाख रूबल यानी लगभग 4.92 लाख रुपये थी। अब यह बढ़कर 6.37 लाख रूबल यानी लगभग 7.53 लाख रुपये हो गई है। इसके बावजूद रूस में मेडिकल शिक्षा भारतीय विद्यार्थियों के लिए एक विकल्प बनी हुई है।
विद्यार्थियों को प्रवेश लेने से पहले ट्यूशन फीस के साथ हॉस्टल, भोजन, यात्रा, बीमा और अन्य खर्चों का आकलन करना चाहिए। विश्वविद्यालय की मान्यता और भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए लागू नियमों की जानकारी लेना भी जरूरी है।
NEET की पात्रता और प्रवेश प्रक्रिया का असर
डॉ. आशीष महिंद्रा के अनुसार, विदेश में मेडिकल शिक्षा के लिए आवेदन करने वाले भारतीय विद्यार्थियों की संख्या पर नीट की पात्रता और न्यूनतम अंकों का असर पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि इस वर्ष न्यूनतम अंकों की सीमा में बदलाव और भारत में प्रवेश प्रक्रिया में देरी के कारण रूस में दाखिले प्रभावित हुए।
उनके अनुसार, पिछले वर्ष सामान्य श्रेणी के विद्यार्थियों के लिए न्यूनतम अंक 150 के आसपास थे, जबकि इस वर्ष यह सीमा 250 तक रही। आरक्षित श्रेणियों के लिए भी न्यूनतम अंकों में वृद्धि का दावा किया गया है। इन आंकड़ों की संबंधित परीक्षा वर्ष के आधिकारिक नियमों से पुष्टि आवश्यक है।
डॉ. महिंद्रा ने बताया कि नीट और दोबारा परीक्षा से संबंधित प्रक्रियाओं के कारण भारत में मेडिकल प्रवेश में देरी हुई, जबकि रूस में कई विश्वविद्यालयों की प्रवेश प्रक्रिया सितंबर में पूरी हो जाती है। उनके अनुसार, पूरे रूस में लगभग 20 हजार भारतीय विद्यार्थी मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं।
भारतीय विद्यार्थियों के अनुभव
कजान में पढ़ाई कर रहे भारतीय विद्यार्थियों ने अपनी दिनचर्या और पढ़ाई से जुड़े अनुभव साझा किए।
तमिलनाडु के कोयंबटूर निवासी मेडिकल के द्वितीय वर्ष के छात्र चिरंजीवी ने बताया कि 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अगले वर्ष उनके यहां भारतीय विद्यार्थियों के प्रवेश में बढ़ोतरी हुई थी। उन्होंने फीस में वृद्धि और हॉस्टल खर्च का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, हॉस्टल का खर्च करीब छह हजार रूबल प्रति माह है।
वेल्लूर की हरिप्रिया अशोका ने बताया कि कजान स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में उत्तर भारत के विद्यार्थियों की संख्या अधिक है, जबकि दक्षिण भारत के विद्यार्थी भी पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआत में रूसी भाषा और शाकाहारी भोजन की उपलब्धता जैसी चुनौतियां सामने आती हैं। हालांकि, पढ़ाई अंग्रेजी में होने के कारण शैक्षणिक गतिविधियों में मदद मिलती है और धीरे-धीरे स्थानीय भाषा समझ में आने लगती है।
मेडिकल के प्रथम वर्ष की छात्राएं तनू चौधरी और फरहीन खान ने बताया कि यूक्रेन युद्ध का उनकी पढ़ाई और दैनिक दिनचर्या पर विशेष असर नहीं पड़ रहा है। उनके अनुसार, कभी-कभी सुरक्षा अलर्ट जारी होते हैं, लेकिन अब वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपनी दिनचर्या बना चुकी हैं।
भारत-रूस स्वास्थ्य सहयोग को नया अवसर
तातारस्तान में प्रस्तावित Ayurveda Center दोनों देशों के बीच पारंपरिक चिकित्सा, वेलनेस सेवाओं और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हो सकता है। इससे रूस में भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की स्वीकार्यता का आकलन करने और भविष्य की जरूरतों के अनुसार सेवाएं विकसित करने का अवसर मिलेगा।
यदि परियोजना निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ती है, तो 2028 तक केंद्र का निर्माण पूरा होने की संभावना है। इसकी सफलता निर्माण कार्य, आवश्यक मंजूरियों, संचालन व्यवस्था और स्थानीय लोगों की रुचि पर निर्भर करेगी। यह पहल भारत और रूस के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर खोल सकती है।
