शिमला, वायरल सच (ब्यूरो): करीब आठ साल से वित्तीय गतिरोध में फंसे Kishau Project को लेकर मंगलवार को बड़ा समझौता हुआ। हिमाचल प्रदेश समेत छह राज्यों ने नई दिल्ली में 422 मेगावाट क्षमता वाले Kishau Project के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत बिजली घटक की करीब ₹2,000 करोड़ की अनुमानित लागत का अतिरिक्त वित्तीय बोझ हिमाचल प्रदेश पर नहीं पड़ेगा।
दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान उठाएंगे बिजली घटक की लागत
हिमाचल सरकार के अनुसार Kishau Project के जल घटक से लाभान्वित होने वाले दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा राज्य बिजली घटक से जुड़ी हिमाचल की अनुमानित लागत वहन करेंगे।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टौंस नदी पर बनने वाली इस बहुउद्देशीय परियोजना की अनुमानित लागत ₹15,624 करोड़ है।
अमित शाह की मौजूदगी में छह राज्यों ने किया एमओयू
एमओयू पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल और छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किए।
इस दौरान हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा मौजूद रहे।
हिमाचल ने ₹800 करोड़ की हिस्सेदारी पर नहीं दी सहमति
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बताया कि 16 जून को केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में केंद्र सरकार ने सैद्धांतिक रूप से सहमति दी थी कि बिजली घटक में हिमाचल के हिस्से की करीब ₹2,000 करोड़ की अनुमानित लागत दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान वहन करेंगे।
उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने हिमाचल की ओर से ₹800 करोड़ की वित्तीय हिस्सेदारी पर सहमति जताई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
विस्थापन के चलते हिमाचल ने उठाया वित्तीय मुद्दा
सुक्खू के मुताबिक Kishau Project के जल घटक के लिए केंद्र सरकार 90 प्रतिशत अनुदान दे रही है। ऐसे में बिजली घटक के लिए हिमाचल पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के कारण संबंधित क्षेत्र की आबादी को विस्थापन का सामना करना पड़ेगा और परियोजना का सबसे अधिक प्रभाव हिमाचल पर पड़ने की संभावना है। इसलिए राज्य के योगदान और सीमित वित्तीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए हिमाचल के हितों की रक्षा जरूरी थी।
हिमाचल को मिलेगी 1,000 मिलियन यूनिट बिजली
सुक्खू ने कहा कि Kishau Project में हिमाचल प्रदेश के वैध अधिकार और उचित हिस्सेदारी को सुरक्षित करना राज्य के हितों की रक्षा की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
