नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो): भारत के जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश और नवाचार को गति देने के लिए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को ‘बायो निवेश’ नामक रणनीतिक प्लेटफॉर्म लॉन्च किया। इस मौके पर उन्होंने स्टार्टअप्स और निवेशकों के साथ संयुक्त राउंडटेबल बैठक में जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र की संभावनाओं, पूंजी की उपलब्धता और तकनीकों के व्यावसायीकरण पर चर्चा की।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए निवेश बेहद जरूरी है और टिकाऊ निवेश के लिए मजबूत नवाचार आधार होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत के जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र को नई ऊंचाई तक पहुंचाने के लिए नवप्रवर्तकों, निवेशकों, उद्योग और सरकार के बीच बेहतर सहयोग विकसित करना होगा।
उन्होंने कहा कि ‘बायो निवेश’ शोध और उद्यमिता से निकलने वाली तकनीकों को उद्योग, बड़े पैमाने पर उत्पादन और बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसका उद्देश्य जैव प्रौद्योगिकी से जुड़े नवाचारों और निवेश समुदाय के बीच प्रभावी संपर्क स्थापित करना तथा निजी पूंजी के प्रवाह को बढ़ाना है।
पांच साल में बिग फाइव’ की रणनीति पर जोर
मंत्री ने जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए ‘पांच साल में बिग फाइव’ जैसी रणनीति पर विचार करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि कुछ प्रमुख एंकर कंपनियों के निर्माण के लिए केंद्रित संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो इससे ऐसा मजबूत इकोसिस्टम तैयार हो सकता है, जिससे अन्य स्टार्टअप्स को भी आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में विकसित तकनीकों और विचारों के दूसरे क्षेत्रों में संभावित इस्तेमाल की पहचान करने पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि अलग-अलग क्षेत्रों के बीच तकनीकी तालमेल नए अवसर पैदा कर सकता है।
अगली औद्योगिक क्रांति में बायोटेक की अहम भूमिका
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी आने वाली औद्योगिक क्रांति को गति देने वाली प्रमुख तकनीकों में शामिल हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत को इस क्षेत्र में देर से प्रवेश करने की पिछली गलती नहीं दोहरानी चाहिए।
उन्होंने आईटी क्रांति का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर में भारत करीब एक दशक पीछे रह गया था। अब जैव प्रौद्योगिकी आधारित तकनीकी विकास की अगली लहर में देश के पास शुरुआती अवसरों का लाभ उठाने का मौका है।
मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसा इकोसिस्टम तैयार करना होना चाहिए, जहां विज्ञान का जुड़ाव पूंजी से, नवाचार का उद्योग से और शोध का बाजार से हो। सरकार शुरुआती जोखिम कम करने और अनुकूल माहौल तैयार करने में मदद कर सकती है, लेकिन लंबे समय में तकनीकों को बड़े बाजार तक पहुंचाने में निजी पूंजी की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
अंतरिक्ष और परमाणु क्षेत्र का उदाहरण
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने के बाद निवेशकों और उद्यमियों के बीच बने उत्साह का उल्लेख किया। उन्होंने परमाणु क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने से निवेश की संभावनाओं में आए बदलाव का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि सही नीतिगत फैसलों के जरिए उन क्षेत्रों में भी निवेश के नए रास्ते खोले जा सकते हैं, जहां पहले निजी क्षेत्र की भागीदारी सीमित रही है।
निवेशकों को तकनीक और बाजार क्षमता पर ध्यान देने की अपील
मंत्री ने जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कॉरपोरेट भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी में विकास प्रक्रिया लंबी होती है और नियामकीय चुनौतियों के साथ पर्याप्त पूंजी की भी जरूरत होती है। हालांकि, सफल तकनीकों का स्वास्थ्य, समाज और अर्थव्यवस्था पर व्यापक और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने निवेशकों से अपील की कि वे केवल तत्काल फंडिंग राउंड तक सीमित न रहें, बल्कि तकनीक, बौद्धिक संपदा, विकास की संभावनाओं, बाजार क्षमता और भारत से वैश्विक कंपनियां बनाने की संभावना को भी निवेश के दौरान महत्व दें।
वहीं, उन्होंने नवप्रवर्तकों को भी सलाह दी कि वे शुरुआती चरण से ही निवेशकों के साथ संवाद स्थापित करें।
1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान फंड का उल्लेख
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अनुसंधान, विकास एवं नवाचार फंड का भी उल्लेख किया, जिसका कुल प्रावधान 1 लाख करोड़ रुपये है। इसके तहत बाइरैक को जैव प्रौद्योगिकी और इससे जुड़े क्षेत्रों के लिए सेकेंड-लेवल फंड मैनेजर की भूमिका दी गई है।
उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था तकनीक विकसित करने वाले संस्थानों, स्टार्टअप्स और रणनीतिक जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों को दीर्घकालिक और धैर्यपूर्ण पूंजी उपलब्ध कराने में मदद करेगी। खासतौर पर तकनीक के ट्रांसलेशन, स्केल-अप और नवाचार आधारित विनिर्माण के लिए यह महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
पहले संस्करण में 20 स्टार्टअप्स और 50 निवेशक शामिल
‘बायो निवेश’ के पहले संस्करण में 20 उच्च क्षमता वाले जैव प्रौद्योगिकी और डीप-टेक स्टार्टअप्स तथा करीब 50 चुनिंदा निवेशकों ने भाग लिया।
इस प्लेटफॉर्म को सामान्य स्टार्टअप पिचिंग या निवेशक-कनेक्ट कार्यक्रम से आगे ले जाने की योजना है। इसके माध्यम से स्टार्टअप्स को निवेशकों की प्राथमिकताओं और निवेश प्रक्रिया को समझने का अवसर मिलेगा, जबकि निवेशक जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र की वैज्ञानिक, नियामकीय और विकास संबंधी जरूरतों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।
पहले सत्र में स्टार्टअप्स और निवेशकों के बीच सीधे संवाद का आयोजन किया गया। स्टार्टअप्स का चयन उनके नवाचार, विकास के स्तर, बाजार क्षमता, विस्तार की संभावना और नियामकीय तैयारी जैसे मानकों के आधार पर किया गया।
दूसरे सत्र में डॉ. जितेंद्र सिंह ने निवेशकों और स्टार्टअप्स के साथ पूंजी की उपलब्धता, तकनीकों के व्यावसायीकरण, स्केल-अप और नवाचार आधारित विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

