गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो): GMDA गुरुग्राम में ट्रैफिक जाम की समस्या कम करने और मालवाहक वाहनों की आवाजाही व्यवस्थित करने के लिए सिटी लॉजिस्टिक प्लान तैयार कराने जा रहा है। इसके लिए नवंबर में कंसल्टेंट कंपनी नियुक्त करने की तैयारी है। कंपनी को छह महीने के भीतर योजना तैयार करनी होगी। इसमें ट्रकों और अन्य मालवाहक वाहनों के लिए उपयुक्त मार्ग, आवाजाही का समय, पार्किंग, वेयरहाउस और माल चढ़ाने-उतारने की सुविधाओं का अध्ययन किया जाएगा।
शहर में तेजी से बढ़ते औद्योगिक और व्यावसायिक विस्तार के कारण माल की आपूर्ति के लिए भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। दिल्ली-जयपुर हाईवे, केएमपी एक्सप्रेसवे और आईएमटी मानेसर के आसपास के क्षेत्रों में मालवाहक वाहनों का दबाव रहता है। ऐसे में GMDA का सिटी लॉजिस्टिक प्लान माल परिवहन और सामान्य यातायात के बीच बेहतर तालमेल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल होगी।
नवंबर में नियुक्त होगी कंसल्टेंट कंपनी
GMDA की योजना के अनुसार, नवंबर में सिटी लॉजिस्टिक प्लान तैयार करने के लिए कंसल्टेंट कंपनी नियुक्त की जाएगी। कंपनी को शहर में माल परिवहन से जुड़ी मौजूदा व्यवस्था का विस्तृत अध्ययन करके छह महीने में रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
अध्ययन के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि शहर के किन मार्गों पर भारी वाहनों का दबाव अधिक रहता है, किन क्षेत्रों में ट्रकों की आवाजाही से जाम की स्थिति बनती है और किन मार्गों पर मालवाहक वाहनों को व्यवस्थित तरीके से चलाया जा सकता है।
योजना में मालवाहक वाहनों के लिए उपयुक्त रूट और जरूरत के अनुसार आवाजाही के समय निर्धारित करने के सुझाव भी शामिल हो सकते हैं। इससे व्यस्त सड़कों पर भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही कम करने और यातायात प्रबंधन में सुधार करने में मदद मिल सकती है।
गुरुग्राम से मानेसर तक ट्रांसपोर्ट नगर और पार्किंग की कमी
गुरुग्राम से मानेसर तक औद्योगिक इकाइयों, कंपनियों, बाजारों और गोदामों में रोजाना बड़ी मात्रा में माल पहुंचाया जाता है। दिल्ली-जयपुर हाईवे और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में भारी वाहनों की आवाजाही का दबाव बना रहता है। केएमपी और आईएमटी मानेसर क्षेत्र भी माल परिवहन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
इसके बावजूद, संबंधित क्षेत्रों में ट्रांसपोर्ट नगर और व्यवस्थित ट्रक पार्किंग की सुविधाओं की कमी एक बड़ी चुनौती बताई जा रही है। उचित पार्किंग उपलब्ध नहीं होने पर कई बार बड़े ट्रक और ट्राले सड़क किनारे खड़े दिखाई देते हैं। इससे यातायात प्रभावित होने के साथ दुर्घटनाओं का जोखिम भी बढ़ सकता है।
GMDA के सिटी लॉजिस्टिक प्लान के तहत इस समस्या का अध्ययन करके ट्रकों के लिए पार्किंग स्थलों और माल परिवहन से जुड़ी दूसरी सुविधाओं की जरूरत का आकलन किया जाएगा।
ट्रकों के लिए नए रूट और समय निर्धारित करने पर होगा मंथन
प्रस्तावित योजना का एक प्रमुख उद्देश्य मालवाहक वाहनों की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित बनाना है। कंसल्टेंट कंपनी उन सड़कों की पहचान करेगी जहां दिनभर भारी वाहनों का दबाव रहता है। इसके बाद यह अध्ययन किया जाएगा कि किन मार्गों पर ट्रकों को चलाना अधिक उपयुक्त होगा और किन समयावधियों में उनकी आवाजाही को नियंत्रित करने की जरूरत है।
यदि अध्ययन में आवश्यक पाया जाता है, तो व्यस्त मार्गों पर भारी वाहनों की आवाजाही के लिए समय संबंधी सुझाव दिए जा सकते हैं। इससे कार्यालयों के व्यस्त समय, बाजारों और प्रमुख चौराहों पर यातायात दबाव कम करने के उपाय तैयार करने में मदद मिलेगी।
शहर की प्रमुख सड़कों और हाईवे से जुड़े क्षेत्रों में मालवाहक वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने से औद्योगिक आपूर्ति और सामान्य यातायात के बीच बेहतर संतुलन बनाने का लक्ष्य है।
पार्किंग, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक केंद्रों का होगा आकलन
सिटी लॉजिस्टिक प्लान में केवल ट्रकों के रूट तय करने तक सीमित रहने के बजाय माल भंडारण और आपूर्ति से जुड़ी सुविधाओं का भी अध्ययन किया जाएगा। कंपनी यह देखेगी कि शहर में मौजूदा वेयरहाउस, लॉजिस्टिक केंद्र और माल चढ़ाने-उतारने के स्थान वर्तमान जरूरतों को पूरा कर पा रहे हैं या नहीं।
दिल्ली-जयपुर हाईवे और एक्सप्रेसवे के आसपास बड़े वेयरहाउस होने के कारण इन क्षेत्रों में मालवाहक वाहनों की आवाजाही महत्वपूर्ण है। यदि माल भंडारण और ट्रक पार्किंग की व्यवस्था बेहतर तरीके से विकसित की जाती है, तो सड़कों पर अनावश्यक रूप से खड़े रहने वाले वाहनों की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।
योजना में भविष्य की औद्योगिक और व्यावसायिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लॉजिस्टिक सुविधाओं के विस्तार और सुधार से जुड़े सुझाव भी दिए जा सकते हैं।
सड़क किनारे ट्रकों की पार्किंग से जाम और हादसों का खतरा
शहर की कई प्रमुख सड़कों पर मालवाहक वाहनों की पार्किंग यातायात प्रबंधन के लिए चुनौती बनी हुई है। सड़क किनारे ट्रक और ट्राले खड़े रहने से सड़क की उपलब्ध चौड़ाई कम हो सकती है। इससे दूसरे वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है।
प्रस्तावित अध्ययन में ऐसे स्थानों की पहचान करना उपयोगी होगा जहां ट्रकों की पार्किंग के कारण यातायात बाधित होता है। इसके आधार पर वैकल्पिक पार्किंग स्थलों, मालवाहक वाहनों के लिए निर्धारित मार्गों और बेहतर निगरानी व्यवस्था से जुड़े सुझाव तैयार किए जा सकते हैं।
हालांकि, नए रूट, पार्किंग स्थलों और समय संबंधी नियमों को लागू करने का अंतिम निर्णय संबंधित विभागों की कार्रवाई और योजना के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।
छह महीने में रिपोर्ट तैयार करने का लक्ष्य
GMDA के इंजीनियर एवं मोबिलिटी डिवीजन से जुड़े रमेश चंद्र देशवाल के अनुसार, नवंबर में लॉजिस्टिक प्लान तैयार करने के लिए कंपनी को जिम्मेदारी सौंपने की योजना है। कंपनी को छह महीने के भीतर रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
रिपोर्ट मिलने के बाद गुरुग्राम की माल ढुलाई और आपूर्ति व्यवस्था में सुधार के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसमें भारी वाहनों के रूट, पार्किंग, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक केंद्रों से जुड़े सुझावों के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
GMDA का सिटी लॉजिस्टिक प्लान गुरुग्राम की यातायात व्यवस्था के लिए दीर्घकालिक योजना के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अध्ययन के बाद सुझाए गए उपायों को किस तरह लागू किया जाता है और ट्रकों की पार्किंग तथा माल परिवहन से जुड़ी समस्याओं का कितना प्रभावी समाधान निकलता है।
