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एशियन गेम्स कबड्डी फाइनल में चमकीं Gurugram की निकिता, सिर्फ 17 की उम्र में देश को दिलाया गोल्ड

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एशियन गेम्स कबड्डी फाइनल में चमकीं Gurugram की निकिता,

Gurugram, वायरल सच (ब्यूरो): एशियन गेम्स के कबड्डी मैट पर शनिवार को भारत की बेटियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। स्वर्ण पदक के रोमांचक मुकाबले में भारतीय महिला टीम ने ईरान को 37-34 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

निर्णायक मुकाबले में तीन अंकों की जीत ने भारतीय खिलाड़ियों के जुझारूपन, रणनीति और दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता को दिखाया। इससे पहले ग्रुप चरण में भी भारत ने ईरान को 37-23 से शिकस्त दी थी।

निकिता ने एशियन गेम्स में दिखाया दम

इस ऐतिहासिक जीत में Gurugram की निकिता कुमारी भी भारतीय टीम का हिस्सा रहीं। महज 17 साल की निकिता मूल रूप से हरियाणा के हांसी जिले के गांव हसनगढ़ की रहने वाली हैं और गुरुग्राम के द्रोणाचार्य राजकीय महाविद्यालय में प्रथम वर्ष की छात्रा हैं।

निकिता भारतीय महिला टीम की सबसे कम उम्र की खिलाड़ियों में शामिल हैं। सीनियर स्तर के इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहली बार उतरकर उन्होंने अपने आत्मविश्वास और खेल क्षमता का परिचय दिया।

ईरान के खिलाफ ग्रुप मुकाबले में निकिता ने दबाव के समय दो महत्वपूर्ण सुपर रेड किए थे और उनकी कोई रेड खाली नहीं गई थी। फाइनल में चोट लगने के बावजूद उन्होंने मैदान नहीं छोड़ा और मुकाबला जारी रखा।

आठ साल की उम्र से कबड्डी खेल रहीं निकिता

Gurugram की निकिता निकिता की इस उपलब्धि के पीछे वर्षों की कड़ी मेहनत है। उन्होंने महज आठ वर्ष की उम्र में हसनगढ़ के सरकारी स्कूल से कबड्डी का अभ्यास शुरू किया था।

अंडर-18 स्तर पर निकिता भारतीय टीम की कप्तानी भी कर चुकी हैं और टीम को स्वर्ण पदक दिला चुकी हैं। अब सीनियर भारतीय टीम की जर्सी में एशियन गेम्स का गोल्ड उनके खेल सफर की बड़ी उपलब्धि बन गया है।

कोच डॉ. सुनील डबास ने दी बधाई

निकिता को प्रशिक्षित करने वालीं कबड्डी विशेषज्ञ, पद्मश्री एवं द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित डॉ. सुनील डबास ने भारतीय महिला टीम को स्वर्ण पदक जीतने पर बधाई दी।

उन्होंने निकिता को विशेष रूप से बधाई देते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच पर जगह बनाना और टीम की स्वर्णिम यात्रा का हिस्सा बनना उसके कठिन परिश्रम का परिणाम है।

निकिता ने जिस आत्मविश्वास के साथ सीनियर खिलाड़ियों के बीच अपनी जगह बनाई है, वह दूसरी युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी है। पूरी भारतीय टीम ने दबाव के क्षणों में संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाया।

छोटे गांव से एशियन गेम्स के गोल्ड तक का सफर

भारतीय महिला टीम की यह उपलब्धि सिर्फ एक स्वर्ण पदक की कहानी नहीं है। Gurugram की निकिता जैसी युवा खिलाड़ी यह संदेश देती हैं कि छोटे गांव से निकलकर भी अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा जा सकता है।

भारत ने महिला कबड्डी में इससे पहले एशियन गेम्स में तीन स्वर्ण पदक जीते थे। टीम ने 2022 हांगझोउ एशियन गेम्स में भी स्वर्ण हासिल किया था और इस बार खिताब बचाते हुए अपने स्वर्णिम सफर को आगे बढ़ाया।

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