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गुरुग्राम में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और किसान संगठनों के बीच 4 घंटे मंथन

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गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो): केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को खत्म करने की दिशा में गुरुग्राम में अहम बैठक हुई। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर और संयुक्त किसान मोर्चा के बीच गुरुवार देर रात तक करीब चार घंटे तक चली बैठक में 13 राज्यों के किसान प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। किसान नेताओं ने बैठक में अपनी 10 प्रमुख मांगों का पत्र केंद्रीय मंत्री को सौंपा।

बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों पर संबंधित मंत्रियों से बातचीत कर जल्द समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। वहीं किसान नेताओं ने कहा कि फिलहाल उन्हें केवल आश्वासन मिला है और वास्तविक संतुष्टि मांगें पूरी होने के बाद ही होगी। हालांकि, उन्होंने सरकार के रुख को इस बार सकारात्मक बताया।

हर मांग पर विस्तार से हुई चर्चा

किसान संगठनों के संयोजक जगदीप सिंह डल्लेवाल ने बताया कि बैठक में किसानों की प्रत्येक मांग पर विस्तार से चर्चा हुई। सचिव हरदीप सिंह गिल ने कहा कि यदि अगले 5 से 10 दिनों में 2 से 4 प्रमुख मांगें भी पूरी कर दी जाती हैं तो इससे किसानों का सरकार पर भरोसा मजबूत होगा और यह संदेश जाएगा कि सरकार किसान हित में कदम उठा रही है।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील से खेती और डेयरी को बाहर रखने की मांग

किसानों की प्रमुख मांगों में भारत-अमेरिका ट्रेड डील से कृषि क्षेत्र को बाहर रखना शामिल रहा। किसान संगठनों ने आशंका जताई कि ट्रेड डील का खेती और डेयरी क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

किसानों को सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि कृषि और डेयरी क्षेत्र को इस डील से बाहर रखा जाएगा। इस संबंध में जल्द आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किए जाने की बात कही गई। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने यह भी कहा कि कृषि मंत्रालय से बातचीत कर किसानों और विभाग के बीच सीधा संवाद कराया जाएगा।

हाई-टेंशन लाइनों के मुआवजे के लिए नई नीति का भरोसा

बैठक में खेतों से गुजरने वाली हाई-टेंशन बिजली लाइनों से जुड़े मुआवजे का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। किसानों ने इसके लिए स्पष्ट और किसान हितैषी नीति बनाने की मांग की। सरकार की ओर से नई किसान-हितैषी पॉलिसी तैयार करने का भरोसा दिया गया।

किसानों पर दर्ज केस वापस लेने की मांग

किसान नेताओं ने देशभर में किसानों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी उठाई। उन्होंने सरकार से 8 से 10 दिनों के भीतर मामले वापस लेने की अपील की। किसान नेताओं का कहना है कि यदि यह मांग पूरी होती है तो इसे बातचीत की दिशा में बड़ी सफलता माना जाएगा।

जमीन अधिग्रहण के नियमों में बदलाव की मांग

किसानों ने जमीन अधिग्रहण से पहले 75 फीसदी किसानों की लिखित सहमति अनिवार्य करने की मांग रखी। इसके साथ ही मार्केट रेट से चार गुना मुआवजा देने और पहले बंजर भूमि का अधिग्रहण किए जाने जैसे प्रावधानों को दोबारा लागू करने की मांग भी की गई।

इन मांगों पर सरकार की ओर से जल्द निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया। इसके अलावा स्मार्ट मीटर, बिजली सब्सिडी और कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े मुद्दों पर भी बैठक में विस्तार से चर्चा हुई।

13 राज्यों के किसान प्रतिनिधि रहे मौजूद

बैठक में तमिलनाडु से किसान नेता पीआर पांडेयन, कर्नाटक से शांता कुमार, मध्य प्रदेश से लीलाधर राजपूत, उत्तर प्रदेश से प्रहलाद पूनिया और सोमवीर, राजस्थान से इंद्रजीत पन्नीवाला, हरियाणा से अभिमन्यु कोहाड़, हरदीप गिल और राजेंद्र सिंह चहल तथा पंजाब से सुखदेव सिंह भोजराज और सतनाम सिंह बहरू सहित किसान संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

बैठक को किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच संवाद बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब किसानों की नजर सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों पर होने वाली कार्रवाई और प्रमुख मांगों के समाधान पर टिकी है।

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