गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो): गुरुग्राम पुलिस की साइबर अपराध पश्चिम थाना टीम ने खुद को बीमा लोकपाल का अधिकारी बताकर 1.19 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के चार आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। आरोपी लैप्स बीमा पॉलिसियों का लाभ दिलाने का झांसा देकर लोगों से अलग-अलग शुल्क के नाम पर करोड़ों रुपये ठगते थे।
पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भरत जनक सिंह कपाड़िया (68), निवासी इंदिरा नगर, मुंबई, मोहम्मद मोशिरुल हक (35), निवासी शिबपुर, हावड़ा (पश्चिम बंगाल), सुभाष कुमार (40), निवासी पांडव नगर, पूर्वी दिल्ली तथा साहिल गुसांई (19), निवासी मंडावली, पूर्वी दिल्ली के रूप में हुई है।
बीमा लोकपाल अधिकारी बनकर दिया झांसा
पुलिस के अनुसार, 27 जुलाई 2026 को एक पीड़ित ने साइबर अपराध पश्चिम थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता ने बताया कि अज्ञात लोगों ने फोन कर स्वयं को बीमा लोकपाल का अधिकारी बताया और कहा कि उसकी लैप्स बीमा पॉलिसियों के बदले पहले 57 लाख रुपये तथा बाद में एजेंट कोड समाप्त कर लाभार्थी कोड ट्रांसफर करने के नाम पर 1,03,77,220 रुपये दिलवाए जाएंगे।
आरोपियों ने फाइल चार्ज, मेंटेनेंस चार्ज, ट्रांजेक्शन चार्ज और फुल एंड फाइनल सेटलमेंट शुल्क के नाम पर अलग-अलग समय पर पीड़ित से कुल 1.19 करोड़ रुपये विभिन्न बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए। रकम मिलने के बाद आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए।
तकनीकी जांच से पुलिस तक पहुंचे आरोपी
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर तकनीकी साक्ष्यों, बैंक खातों के लेन-देन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर जांच शुरू की। जांच के दौरान 5 अगस्त 2026 को चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
फर्जी आधार-पैन से खोला बैंक खाता
पूछताछ में खुलासा हुआ कि मोहम्मद मोशिरुल हक ने अपने साथियों के साथ मिलकर उत्सव उपाध्याय के नाम से फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड तैयार करवाए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाता खुलवाया गया, जिसमें शिकायतकर्ता के करीब 43 लाख रुपये जमा कराए गए।
भरत जनक सिंह कपाड़िया इस खाते से चेक के माध्यम से रकम निकालकर गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचाता था और बदले में अपना कमीशन रखता था।
साइबर कैफे से तैयार होते थे फर्जी दस्तावेज
जांच में सामने आया कि सुभाष कुमार, जो पूर्वी दिल्ली में साइबर कैफे संचालित करता है, फर्जी आधार और पैन कार्ड तैयार करता था। वहीं साहिल गुसांई फर्जी दस्तावेज तैयार कराने, सिम कार्ड जारी कराने और कॉलिंग के लिए सिम उपलब्ध कराने में मदद करता था।
पुलिस ने चारों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है। रिमांड के दौरान गिरोह के अन्य सदस्यों, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य मामलों की जांच की जा रही है।

