नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो): कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक के बाद पार्टी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR प्रक्रिया को तत्काल रोकने और उसके दौरान हटाए गए 13.30 करोड़ नामों को बहाल करने की मांग की है। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
CWC बैठक के बाद कांग्रेस ने रखीं मांगें
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बैठक के बाद कहा कि करीब ढाई घंटे चली CWC बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि पार्टी राहुल गांधी की ओर से उठाए जा रहे ‘वोट चोरी’ के आरोपों से जुड़े मुद्दों को आगे भी उठाएगी।
वेणुगोपाल के मुताबिक कांग्रेस की प्रमुख मांगों में CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR को तत्काल निलंबित करना और मतदाता सूची से हटाए गए 13.30 करोड़ नामों को बहाल करना शामिल है। कांग्रेस ने SIR से तैयार हो रही मतदाता सूचियों की पारदर्शिता और प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता पर भी सवाल उठाए हैं।
प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप के आरोप लगाए हैं। पार्टी ने इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग की है। ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें पार्टी के राजनीतिक दावे के रूप में देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन और आंदोलन जारी रखने की बात कही है। पार्टी नेताओं के अनुसार, SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों के आंकड़ों को लेकर कांग्रेस जमीनी स्तर पर अभियान चलाएगी।
राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ अभियान का समर्थन
रमेश ने चुनावों की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि कांग्रेस संसद के भीतर विरोध के साथ-साथ सड़कों पर भी अपना अभियान जारी रखेगी।
चुनाव आयोग ने क्या कहा ?
वहीं, चुनाव आयोग ने कहा है कि आयोग के सदस्यों की ओर से सुझाव देना या अलग-अलग राय सामने रखना सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के अनुसार, सभी फैसले निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं। हालिया रिपोर्टों में आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात भी कही है।
SIR को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच मतभेद ऐसे समय में सामने आए हैं जब मतदाता सूची के पुनरीक्षण और हटाए गए नामों को लेकर राजनीतिक बहस तेज है।
